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भारतीय रेलवे का ‘वंदे भारत’ युग : 7 साल में बदली तस्वीर

जनवरी 2026 में हावड़ा-गुवाहाटी रूट पर दौड़ेगी देश की पहली ‘वंदे भारत स्लीपर’; 17 घंटे का सफर सिमटकर होगा 14 घंटे, खाने में मिलेगा क्षेत्रीय जायका

संतोष सेठ की रिपोर्ट  | नई दिल्ली

वर्ष 2047 तक भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे ने अपनी रफ्तार और तेज कर दी है।

देश में सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों का पर्याय बन चुकी ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ अब अपने नए अवतार में पटरियों पर दौड़ने को तैयार है।

लगभग 7 साल पहले 15 फरवरी 2019 को वाराणसी रूट पर शुरू हुई यह यात्रा अब ‘चेयर कार’ से आगे बढ़कर ‘स्लीपर क्लास’ तक पहुंच गई है।

दिसंबर 2025 तक देश के 274 जिलों में 164 वंदे भारत सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, जिनमें 7.5 करोड़ से ज्यादा यात्रियों ने सफर किया है। अब रेलवे का अगला लक्ष्य लंबी दूरी की यात्रा को आरामदायक बनाना है।

जनवरी 2026: हावड़ा-गुवाहाटी स्लीपर का आगाज

रेलवे के लिए जनवरी 2026 एक ऐतिहासिक महीना साबित होने जा रहा है। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पश्चिम बंगाल के हावड़ा और असम के गुवाहाटी के बीच शुरू होने वाली है।

  • समय की बचत: अभी सरायघाट एक्सप्रेस (12345/46) इस दूरी को तय करने में 17 घंटे लेती है, लेकिन वंदे भारत स्लीपर इसे मात्र 14 घंटे में पूरा करेगी। यानी सीधे 3 घंटे की बचत।

  • सुविधाएं: 16 कोच वाली इस ट्रेन में 823 यात्रियों की क्षमता है। इसमें एसी फर्स्ट क्लास, टू-टियर और थ्री-टियर कोच शामिल हैं।

  • विश्वस्तरीय टॉयलेट, एर्गोनॉमिक ड्राइवर केबिन और सामान रखने के लिए विशेष जगह इसे खास बनाती है।

वंदे भारत 1.0 से 4.0 तक का सफर

वंदे भारत केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि तकनीक के निरंतर विकास की कहानी है:

  1. वंदे भारत 1.0: 2019 में शुरुआत, 160 किमी/घंटा की क्षमता।

  2. वंदे भारत 2.0 (2022): वजन में हल्की (392 टन), ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली से लैस और बेहतर एसी सिस्टम।

  3. वंदे भारत 3.0: यह वर्तमान जनरेशन है, जो मात्र 52 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेती है। इसमें शोर कम होता है और यह यूरोपीय ट्रेनों को टक्कर देती है।

  4. वंदे भारत 4.0 (भविष्य): 2025 के अंत से शुरू होने वाले इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य 350 किमी/घंटा की गति को संभालने वाली ट्रेनें बनाना है, जो ग्लोबल मार्केट में निर्यात के लिए भी तैयार होंगी।

सुरक्षा के लिए ‘कवच’ और स्वाद में ‘लोकल’

यात्रियों की सुरक्षा के लिए इन ट्रेनों में स्वदेशी ‘कवच’ (Kavach) प्रणाली लगाई गई है, जो ट्रेनों की टक्कर रोकने और ओवर-स्पीडिंग पर अपने आप ब्रेक लगाने में सक्षम है।

वहीं, यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए दिसंबर 2025 से रेलवे ने ‘रीजनल मेनू’ (Regional Menu) शुरू किया है।

अब आपको ट्रेन में महाराष्ट्र का कांदा पोहा, बिहार का चंपारण मीट, बंगाल का कोशा पनीर और दक्षिण का अप्पम खाने को मिलेगा। जिस राज्य से ट्रेन गुजरेगी, वहां का स्वाद आपकी थाली में होगा।

भविष्य का रोडमैप: 2047 तक 4500 ट्रेनें

भारतीय रेलवे का विजन डॉक्युमेंट बताता है कि 2030 तक देश में 800 वंदे भारत ट्रेनें चलाने का लक्ष्य है, जिसे 2047 तक बढ़ाकर 4,500 ट्रेनों तक ले जाया जाएगा।

‘मेक इन इंडिया’ के तहत 90% स्थानीय उपकरणों से बनी ये ट्रेनें न केवल भारत की मोबिलिटी (Mobility) को बदल रही हैं, बल्कि आर्थिक एकीकरण का भी बड़ा जरिया बन रही हैं।

Santosh SETH

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