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US खुफिया चीफ तुलसी गबार्ड का इस्तीफा, ईरान पर ट्रंप से था मतभेद!

अमेरिका में बड़ा फेरबदल: खुफिया चीफ तुलसी गबार्ड का इस्तीफा; पति के कैंसर का दिया हवाला, क्या ईरान पर ट्रंप से मतभेद है असली वजह?

वाशिंगटन डीसी/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

अमेरिका के ट्रंप प्रशासन से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी खुफिया विभाग की चीफ और नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने आधिकारिक तौर पर इस फैसले के पीछे अपने पति की एक दुर्लभ बीमारी का हवाला दिया है।

गबार्ड ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुई एक अहम बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने इस फैसले से अवगत कराया।

पति के कैंसर से लड़ाई में साथ देने के लिए छोड़ा पद

अपने इस्तीफे में तुलसी गबार्ड ने भावुक होते हुए बताया कि वह अपने पति की हड्डी के कैंसर (Bone Cancer) जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारी से लड़ाई में उनका साथ देने के लिए यह महत्वपूर्ण पद छोड़ रही हैं।

गबार्ड ने कहा, “मुझ पर आपके (राष्ट्रपति ट्रंप के) भरोसे और पिछले डेढ़ साल से नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर के ऑफिस को लीड करने के मौके के लिए मैं दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।”

30 जून होगा आखिरी दिन, एरॉन लुकास संभालेंगे कमान

जानकारी के मुताबिक, तुलसी गबार्ड के कामकाज का आखिरी दिन 30 जून 2026 होगा। वह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान इस्तीफा देने वाली चौथी कैबिनेट अधिकारी बन गई हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी गबार्ड के इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। ट्रंप ने कहा कि, “दुर्भाग्य से तुलसी गबार्ड 30 जून को प्रशासन छोड़ देंगी।”

इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि गबार्ड के जाने के बाद नेशनल इंटेलिजेंस के प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर एरॉन लुकास (Aaron Lucas) एक्टिंग डायरेक्टर (कार्यवाहक प्रमुख) के तौर पर जिम्मेदारी संभालेंगे।

क्या इस्तीफे के पीछे है ट्रंप से ‘ईरान’ पर मतभेद?

भले ही इस्तीफे की आधिकारिक वजह पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी बताई गई हो, लेकिन वाशिंगटन के सियासी और कूटनीतिक हलकों में इसकी कुछ और ही चर्चा है।

  • ईरान पर मतभेद: इससे पहले ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि ईरान पर हमला करने के राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया फ़ैसले के बाद तुलसी गबार्ड सरकार से अलग हो सकती हैं। इस फ़ैसले से प्रशासन के भीतर भारी मतभेद पैदा हो गए थे।

  • बयानों में विरोधाभास: गबार्ड ने सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी को दिए गए अपने लिखित बयान में स्पष्ट कहा था कि ‘पिछले साल अमेरिकी हमलों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह तबाह हो जाने के बाद ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता को फिर से बनाने का कोई प्रयास नहीं किया था।’

  • यह खुफिया आकलन सीधे तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप के उन बयानों के विपरीत था, जिनमें ट्रंप बार-बार ज़ोर देकर कह रहे थे कि ईरान से बढ़ते खतरे को टालने के लिए यह युद्ध बेहद ज़रूरी था।

तुलसी गबार्ड का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर तनाव चरम पर है, और उनका जाना ट्रंप प्रशासन की विदेश और रक्षा नीतियों पर कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।