इलाहाबाद हाईकोर्ट के 3 महीने में पंचायत चुनाव कराने के आदेश के बाद, प्रशासनिक व्यस्तताओं के चलते यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है।
यूपी पंचायत चुनाव: 3 महीने में चुनाव कराना आसान नहीं; प्रशासनिक अड़चनों के चलते सुप्रीम कोर्ट जा सकती है योगी सरकार, जानें क्या बोले ओपी राजभर
लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए 3 महीने के अल्टीमेटम के बाद राज्य की सियासत और प्रशासन में हलचल तेज हो गई है।
हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बावजूद, वर्तमान प्रशासनिक परिस्थितियों (जातीय जनगणना, परीक्षाएं और आगामी विधानसभा चुनाव) को देखते हुए 3 महीने के भीतर पंचायत चुनाव करा पाना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।
उच्चपदस्थ सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है।
सरकार और प्रशासन के सामने पंचायत चुनाव को लेकर कई बड़ी व्यावहारिक और प्रशासनिक अड़चनें हैं:
जातीय जनगणना की व्यस्तता: उत्तर प्रदेश में जनगणना का दूसरा चरण 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी के बीच प्रस्तावित है। इस दौरान पूरी प्रशासनिक मशीनरी इसी काम में व्यस्त रहेगी।
विधानसभा चुनाव 2026 की आहट: जनवरी के पहले सप्ताह में ही यूपी विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने की प्रबल संभावना है।
ऐसे में न तो सरकार और न ही विपक्ष चाहेगा कि उनका समय और संसाधन पंचायत चुनावों में बंटे।
OBC आरक्षण रिपोर्ट का इंतजार: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए राज्य सरकार ने 20 मई को ‘समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ का गठन किया था।
आयोग का 6 महीने का कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा होगा। आयोग के अध्यक्ष राम औतार सिंह के अनुसार, अब तक 75 में से 42 जिलों का दौरा पूरा हुआ है, 33 जिलों का सर्वे अभी बाकी है।
(नोट : पंचायत चुनाव की मतदाता सूची राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 10 जून को ही जारी की जा चुकी है और आयोग अपनी तैयारियां पूरी होने का दावा कर रहा है।)
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि सरकार न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है, लेकिन अभी उन्होंने न्यायालय का आदेश पढ़ा नहीं है।
आदेश का विस्तार से अध्ययन करने और उसमें दिए गए निर्देशों को समझने के बाद ही सरकार अगला कदम उठाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय में जल्दबाजी में कोई भी निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट (जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच) ने बुधवार को इम्तियाज हुसैन की याचिका पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते, तब तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक (Administrator) के रूप में कार्य करते रहेंगे।
अब सबकी निगाहें योगी सरकार के अगले कदम और सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी हैं।
| प्रमुख बिंदु (Key Highlights) | विस्तृत विवरण (Details) |
| ⚖️ हाईकोर्ट का आदेश | 3 महीने के भीतर यूपी पंचायत चुनाव कराने का निर्देश। |
| 🚨 सरकार की संभावित रणनीति | हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की संभावना। |
| 🛑 चुनाव में अड़चनें (चुनौतियां) | 1. जातीय जनगणना (दिसंबर-जनवरी)। 2. यूपी विधानसभा चुनाव (जनवरी में अधिसूचना संभव)। |
| 📊 OBC आरक्षण आयोग | 75 में से 42 जिलों का सर्वे पूरा, 33 जिलों की रिपोर्ट अभी बाकी। |
| 🗣️ ओपी राजभर का बयान | “न्यायालय के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा।” |
| 🧑💼 ग्राम प्रधानों की स्थिति | चुनाव संपन्न होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधान ही प्रशासक बने रहेंगे। |
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