CM योगी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा का किया विमोचन
कच्चे घर से राष्ट्रपति भवन तक का सफर: CM योगी ने किया पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा का विमोचन, बताया युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत”
लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राजधानी के लोकभवन सभागार में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया।
इस गरिमामयी अवसर पर स्वयं पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को अभावों से जूझते हुए देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की एक बेहद प्रेरणादायी यात्रा करार दिया।
“अभावों को ढाल नहीं, आगे बढ़ने का मार्ग बनाया”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि रामनाथ कोविन्द ने कभी भी अपने अभावों को अपनी प्रगति में बाधा या किसी से कुछ मांगने का आधार नहीं बनने दिया।
-
संघर्षपूर्ण जीवन: कानपुर के परौंख गांव के एक अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे कोविन्द के सिर से बचपन में ही मां का साया उठ गया था।
-
इसके बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की, अधिवक्ता (वकील) के रूप में गरीबों की आवाज बने और फिर सार्वजनिक जीवन व राजनीति में कदम रखा।
-
शिखर तक का सफर: भाजपा पदाधिकारी से लेकर राज्यसभा सदस्य, बिहार के राज्यपाल और अंततः 145 करोड़ भारतीयों के संवैधानिक प्रमुख (राष्ट्रपति) बनने तक का उनका सफर दृढ़ संकल्प का परिचायक है। सीएम ने कहा, “घर कच्चे थे, लेकिन इरादे पक्के थे।”
जन्मभूमि और पुराने संबंधों से गहरा अनुराग
मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति की सरलता और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद भी जब रामनाथ कोविन्द कानपुर या लखनऊ आते हैं, तो वे अपने पुराने परिचितों—चाट वाले, चाय वाले, और कपड़े वाले—से मिलना नहीं भूलते।
उनका जीवन यह संदेश देता है कि व्यक्ति चाहे कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाए, उसे अपने मूल और जन्मभूमि को कभी नहीं भूलना चाहिए।
इस संदर्भ में सीएम योगी ने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा:
“अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।” (अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं)।
हिंदी रूपांतरण का विमोचन
गौरतलब है कि इस आत्मकथा का पहला विमोचन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था। अब इसका हिंदी रूपांतरण उनकी पावन जन्मभूमि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विमोचित किया गया है, जो प्रदेशवासियों के लिए विशेष महत्व रखता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में रामनाथ कोविन्द ने दुनिया भर में भारत का पक्ष बेहद प्रभावी ढंग से रखा और उनका सहज व्यवहार तथा देश के प्रति समर्पण हर भारतीय के लिए अनुकरणीय है।
📊 रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा और सफर
|
मुख्य पहलू (Key Aspects) |
विस्तृत विवरण (Details) |
|
📘 पुस्तक का नाम |
‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’। |
|
📍 विमोचन स्थल |
लोकभवन सभागार, लखनऊ। |
|
✍️ विमोचनकर्ता |
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (पूर्व राष्ट्रपति की उपस्थिति में)। |
|
🏡 जन्मभूमि (मूल) |
परौंख गांव, कानपुर (उत्तर प्रदेश)। |
|
📈 राजनीतिक/सार्वजनिक सफर |
अधिवक्ता ➡️ राज्यसभा सदस्य ➡️ बिहार के राज्यपाल ➡️ भारत के राष्ट्रपति। |
|
🎯 सीएम योगी का संदेश |
“घर कच्चे थे, लेकिन इरादे पक्के थे। कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ इच्छाशक्ति से मंजिल पाई जा सकती है।” |











