यूपी पंचायत चुनाव: योगी कैबिनेट से पिछड़ा वर्ग आयोग को मंजूरी
यूपी पंचायत चुनाव: योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, OBC आरक्षण तय करने के लिए ‘समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ के गठन को मंजूरी
लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई अहम कैबिनेट बैठक में कुल 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी है। इनमें सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला राज्य के आगामी पंचायत चुनावों को लेकर है।
कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए पंचायत चुनावों में ओबीसी (OBC) आरक्षण का नया आधार तय करने के लिए ‘उ०प्र० राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इसे आगामी पंचायत चुनावों से पहले योगी सरकार का एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
क्यों पड़ी आयोग के गठन की जरूरत?
राज्य सरकार द्वारा दी गई आधिकारिक सूचना के मुताबिक, माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के आदेशों के अनुपालन में यह कदम उठाया गया है।
आयोग का मुख्य काम त्रिस्तरीय पंचायत निकायों में आरक्षण प्रदान करने के लिए ‘पिछड़ेपन की प्रकृति और प्रभावों’ की समकालीन, सतत् और अनुभव जन्य (Empirical) जांच और अध्ययन करना है।
इसी रिपोर्ट और अध्ययन के आधार पर यह तय किया जाएगा कि अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को निकायवार कितना आनुपातिक आरक्षण दिया जाए।
आरक्षण का क्या होगा प्रावधान? 27% तय की गई है लिमिट
यूपी सरकार के नियमों के अनुसार, राज्य में त्रिस्तरीय पंचायतों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़े वर्गों (OBC) के लिए पदों का आरक्षण राज्य की कुल जनसंख्या में उनके अनुपात के आधार पर ही तय किया जाएगा।
पिछड़े वर्गों के लिए यह आरक्षण त्रिस्तरीय पंचायतों के कुल पदों की संख्या के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
यदि किसी क्षेत्र में पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, तो नियम के तहत विधिवत सर्वेक्षण (Survey) कराकर उनकी जनसंख्या निर्धारित की जाएगी।
कैसा होगा आयोग और कौन होंगे सदस्य?
जानकारी के अनुसार, इस नए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का स्वरूप 5 सदस्यीय होगा:
आयोग में राज्य सरकार द्वारा 5 सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी, जिन्हें पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों का गहरा ज्ञान और अनुभव हो।
इनमें से एक सदस्य माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश (Retired HC Judge) होंगे, जिन्हें आयोग के ‘अध्यक्ष’ के रूप में नामित किया जाएगा।
इस आयोग के अध्यक्ष और सभी सदस्यों का कार्यकाल नियुक्ति की तारीख से 06 माह (6 Months) का होगा।
क्या है इस फैसले के सियासी मायने?
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर एक याचिका के बाद अदालत ने राज्य सरकार को समय पर चुनाव सुनिश्चित करने और ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले के तहत पिछड़ा वर्ग आयोग गठित करने का आदेश दिया था।
इस फैसले से योगी सरकार आगामी पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए एक मजबूत और कानूनी रूप से पुख्ता आधार तैयार कर रही है।
इससे पंचायत स्तर पर पिछड़े वर्ग की राजनीतिक और सामाजिक हिस्सेदारी का सटीक आकलन हो सकेगा।
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