विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में अपनों की नाराजगी बनी बड़ी चुनौती; डैमेज कंट्रोल की कमान संभालेंगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह।
विधानसभा चुनाव से पहले BJP में ‘भीतरघात’ का डर: ‘सेटिंग-गेटिंग’ से रूठे कार्यकर्ता, अमित शाह संभालेंगे डैमेज कंट्रोल की कमान”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
विधानसभा चुनावों में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने विपक्ष से बड़ी चुनौती खुद अपने घर में खड़ी हो गई है।
संगठन में लंबे समय से पद और जिम्मेदारी की उम्मीद लगाए बैठे पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी और दूसरे दलों से आए नेताओं को तरजीह देने की नीति ने पार्टी के भीतर गहरे असंतोष को जन्म दे दिया है।
हालात यह हैं कि चुनावी दौरों पर पहुंच रहे बड़े नेताओं को अब सार्वजनिक मंचों और बैठकों में कार्यकर्ताओं के सीधे गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
पार्टी संगठन को चुनावी मोड में लाने के लिए ताबड़तोड़ बैठकें की जा रही हैं, जिनमें शीर्ष नेता कार्यकर्ताओं को ‘देवतुल्य’ बताकर उनका मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके उलट है।
उपेक्षा का दर्द: विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों में समायोजन न होने से सालों से पार्टी की सेवा कर रहे कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
पदों की बंदरबांट: कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि संगठन में पदाधिकारियों का चयन ‘पीक एंड चूज’ (चहेतों को चुनना) और ‘सेटिंग-गेटिंग’ के सिद्धांत पर हो रहा है, जिसके चलते कई समर्पित कार्यकर्ता अब निराश होकर घर बैठ गए हैं।
भाजपा नेतृत्व के लिए यह नाराजगी इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि चुनाव में उम्मीदवारों की जीत केवल रैलियों से नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता से तय होती है।
बूथ से लेकर जिला स्तर तक सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं को आशंका है कि चुनाव के समय उनसे केवल मेहनत करवाई जाएगी और सत्ता में आने पर फैसले व जिम्मेदारी के समय उन्हें किनारे कर दिया जाएगा।
यदि ये असंतुष्ट कार्यकर्ता चुनाव प्रचार से दूरी बनाते हैं या गुपचुप तरीके से पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम (भीतरघात) करते हैं, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर भाजपा के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
पार्टी के भीतर पनप रहे इस बगावती सुर को शांत करने के लिए अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद डैमेज कंट्रोल की कमान संभालेंगे।
अपने आगामी दौरों के दौरान अमित शाह संगठन में तालमेल बैठाने और रूठे कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करेंगे।
नेतृत्व को यह स्पष्ट संदेश मिल चुका है कि चुनावी रणनीति और बड़े नेताओं के हवा-हवाई दौरों से ही जीत सुनिश्चित नहीं होगी; जब तक पदों की बंदरबांट और जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की शिकायतों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक पार्टी अपने ही असंतुष्टों को चुनावी चुनौती बनने से नहीं रोक पाएगी।
| महत्वपूर्ण पहलू (Key Aspects) | विस्तृत विवरण (Details) |
| 🎯 मुख्य चुनौती | सत्ता की हैट्रिक लगाने के बीच पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं का असंतोष। |
| ⚠️ नाराजगी का मुख्य कारण | संगठन में पदों की अनदेखी, दल-बदलुओं को तरजीह और ‘सेटिंग-गेटिंग’ का आरोप। |
| 📉 संभावित चुनावी नुकसान | बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और चुनाव में ‘भीतरघात’ का बड़ा खतरा। |
| 🛠️ शीर्ष नेतृत्व का एक्शन | बैठकों में कार्यकर्ताओं को ‘देवतुल्य’ बताकर मनाने की कवायद जारी। |
| 🛡️ डैमेज कंट्रोल रणनीति | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा असंतोष दूर करने और तालमेल बैठाने का रोडमैप। |
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