यूरोप के कई देशों में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवा; 2010 जैसी 'अरब स्प्रिंग' की आहट।
यूरोप में 2010 जैसी ‘अरब स्प्रिंग’ की आहट: फ्रांस, इटली से लेकर सर्बिया तक सड़कों पर उबला युवा गुस्सा; चुनावी मैदान में उतरे छात्र”
नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
दुनिया को तरक्की, आर्थिक ताकत और लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने वाले यूरोप की सड़कों पर इन दिनों भयंकर गुस्सा उबल रहा है।
फ्रांस से लेकर सर्बिया और इटली से लेकर स्पेन तक, महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और मकानों के आसमान छूते किरायों ने युवाओं को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है।
पुलिस से तीखे टकराव और हिंसक प्रदर्शनों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या यूरोप में 2010 की ‘अरब स्प्रिंग’ (Arab Spring) जैसी कोई बड़ी राजनीतिक क्रांति आकार ले रही है?
विभिन्न देशों में युवाओं और छात्रों का यह आक्रोश अब केवल विरोध-प्रदर्शनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर चुनावी राजनीति की दिशा बदल रहा है।
फ्रांस में छात्र और युवा महंगाई व बदहाल व्यवस्था के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों के बीच एक अजीबोगरीब नारा—”बिस्मिल्लाह से ले तेनब्रे” (Bismillah se le tenbre)—काफी चर्चा में है।
मतलब और शुरुआत: इसका अर्थ “ईश्वर के नाम पर, यह अंधकार है” निकाला गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, यह जुमला सबसे पहले स्नैपचैट (Snapchat) पर एक प्रदर्शनकारी के मैसेज से निकला, जिसने लिखा था- “बिस्मिल्लाह से ले तेनब्रे… हम सब कुछ तोड़ देंगे।”
व्याकरणिक रूप से गलत होने के बावजूद यह नारा युवाओं की जुबान और प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों पर छा गया है (ठीक वैसे ही जैसे भारत में “वास्ते गुनाह्या” वायरल हुआ था)।
इटली में हालात लगातार बेकाबू हो रहे हैं। बोलोग्ना शहर में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों, वामपंथी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भारी हिंसक झड़पें हुई हैं।
ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल: ईंधन की बढ़ती कीमतों के विरोध में ट्रक ड्राइवरों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल कर दी है।
सप्लाई चेन ठप: दक्षिणी इटली में पेट्रोल पंप सूख गए हैं, सुपरमार्केट में ताजे फल-सब्जियों की किल्लत हो गई है और कैप्री व इस्चिया जैसे द्वीपों की फेरी सेवाओं पर रोक का खतरा मंडरा रहा है।
पोलैंड: यहां बड़े पैमाने पर नागरिक प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं।
उनकी मुख्य मांग चुनाव के दौरान किए गए प्रजनन अधिकारों (Reproductive Rights) और विधायी सुधारों के वादों को पूरा कराना है।
ग्रीस: एथेंस में करीब 10,000 छात्रों और शिक्षकों ने मार्च निकाला। उनकी मांग शिक्षा बजट बढ़ाने, स्कूलों की दशा सुधारने, शिक्षकों का वेतन बढ़ाने और युवाओं को किफायती आवास (Affordable Housing) उपलब्ध कराने की है।
यूरोप की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल सर्बिया में देखने को मिल रही है, जहां छात्र आंदोलन सीधे सत्ता परिवर्तन की लड़ाई में बदल गया है।
आंदोलन की चिंगारी: नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की छत गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद छात्रों ने निर्माण में भ्रष्टाचार और जवाबदेही को लेकर उग्र आंदोलन शुरू किया।
अब चुनाव में उतरे छात्र: 25 अक्टूबर के चुनावों के लिए यह आंदोलन अब एक राजनीतिक दल “स्टूडेंट्स विन” (Students Win) में तब्दील हो चुका है।
इसने पूरे देश में 250 उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, कलाकार, किसान और एक लोकप्रिय रैपर भी शामिल हैं।
हजारों की भीड़ राजधानी बेलग्रेड की ओर मार्च कर रही है, जो मौजूदा सरकार के लिए सीधा खतरा बन गई है।
| देश (Country) | मुख्य मुद्दे / कारण (Key Issues) | आंदोलन का प्रभाव और वर्तमान स्थिति (Impact) |
| 🇫🇷 फ्रांस | महंगाई, बेरोजगारी और व्यवस्था का विरोध | छात्रों का उग्र प्रदर्शन; “बिस्मिल्लाह से ले तेनब्रे” का नारा वायरल। |
| 🇮🇹 इटली | ईंधन की बढ़ती कीमतें, आर्थिक संकट | बोलोग्ना में हिंसा; ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल से खाद्य और ईंधन की भारी किल्लत। |
| 🇷🇸 सर्बिया | रेलवे स्टेशन हादसा (16 मौतें), भ्रष्ट तंत्र | 25 अक्टूबर के चुनावों में “स्टूडेंट्स विन” नाम से 250 उम्मीदवार मैदान में। |
| 🇬🇷 ग्रीस | शिक्षा बजट में कटौती, महंगा आवास | एथेंस में 10,000 छात्रों-शिक्षकों का मार्च; बेहतर वेतन और सुविधाओं की मांग। |
| 🇵🇱 पोलैंड | अधूरे चुनावी वादे, प्रजनन अधिकार | प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के खिलाफ सरकारी जवाबदेही को लेकर सड़कों पर जनसैलाब। |
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