Anti-Religious Conversion Cells Mandated in UP Medical Colleges
🚨 UP में बड़ा फैसला: सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में बनेंगे ‘धर्मांतरण रोकथाम सेल’, राज्यपाल का सख्त आदेश”
लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में जबरन धर्मांतरण के मामलों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार और राजभवन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राज्य के सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में तत्काल प्रभाव से धर्मांतरण रोकथाम सेल (Anti-Religious Conversion Cell) बनाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
यह बड़ा कदम हाल ही में लखनऊ के प्रतिष्ठित ‘किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी’ (KGMU) और ‘संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ (SGPGI) में सामने आए धर्मांतरण और अपहरण के गंभीर मामलों के बाद उठाया गया है।
‘The Politics Again’ की इस रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या है पूरा मामला और इन सेल का क्या काम होगा:
🏥 क्यों पड़ी इस सेल की जरूरत? (हालिया विवाद)
मेडिकल परिसरों में इस सेल के गठन के पीछे दो बड़ी आपराधिक घटनाएं मुख्य कारण हैं:
KGMU का धर्मांतरण मामला: केजीएमयू के एक पूर्व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उसने अपनी महिला सहकर्मियों का शोषण किया और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच यूपी एसटीएफ (STF) कर रही है और मेडिकल परिसरों में खुफिया निगरानी बढ़ा दी गई है।
SGPGI कर्मचारी की बेटी का लापता होना: एसजीपीजीआईएमएस के एक कर्मचारी की 21 वर्षीय बेटी 21 मई से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता है।
परिवार ने इरशाद अली नामक व्यक्ति पर अपहरण, पीछा करने और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है।
परिवार को अंदेशा है कि उसे देश से बाहर भी ले जाया जा सकता है। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।
📋 क्या होंगे ‘धर्मांतरण रोकथाम सेल’ के कार्य?
राज्यपाल के आदेश के तुरंत बाद अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी ने अपने सभी संबद्ध मेडिकल और डेंटल संस्थानों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इन ‘धर्मांतरण रोकथाम सेल’ की मुख्य जिम्मेदारियां इस प्रकार होंगी:
निगरानी और जांच: मेडिकल परिसरों में होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखना और धर्मांतरण से जुड़ी किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच करना।
जागरूकता अभियान: छात्रों, रेजिडेंट डॉक्टरों, फैकल्टी और अन्य कर्मचारियों को धर्मांतरण से जुड़े कानूनों, उनके अधिकारों और संस्थागत जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करना।
त्वरित कार्रवाई: सेल में आने वाली किसी भी शिकायत पर बिना किसी देरी के सख्त कदम उठाने के लिए एक मजबूत तंत्र (Mechanism) विकसित करना।
सभी संस्थानों को जल्द से जल्द ये सेल गठित कर इसकी अनुपालन रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
🤝 मुस्लिम धर्मगुरुओं ने किया फैसले का स्वागत
राजभवन के इस कदम को समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन मिल रहा है। कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया है कि इस्लाम में जबरन धर्म परिवर्तन की कोई अनुमति नहीं है।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “राज्यपाल के इस कदम से हमें कोई आपत्ति नहीं है। जबरन धर्म परिवर्तन किसी भी धर्म में स्वीकार्य नहीं है और ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच जरूर होनी चाहिए।”
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