अयोध्या : राम मंदिर चंदे पर अखिलेश के आरोपों को ट्रस्ट ने किया खारिज
अयोध्या: राम मंदिर चंदे में करोड़ों गायब होने के आरोप पर ट्रस्ट का पलटवार, अखिलेश यादव के दावों को किया खारिज; कहा- ‘सब पारदर्शी है’
अयोध्या/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा राम मंदिर के चंदे में करोड़ों रुपये गायब होने के लगाए गए गंभीर आरोपों का कड़ाई से खंडन किया है।
‘The Politics Again’ की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दान और खर्च का पूरा हिसाब-किताब बेहद सावधानी और पूरी पारदर्शिता के साथ रखा जा रहा है।
‘राम जी सब देख रहे हैं, कोई गलती नहीं होगी’
मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने अखिलेश यादव के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि मंदिर निर्माण और दान से जुड़े सभी लेन-देन विधिवत दर्ज किए जाते हैं।
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उन्होंने स्पष्ट किया, “ट्रस्ट के सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और उन्हें लिखित रूप में दर्ज किया जाता है। राम लल्ला से संबंधित कार्य पूरी तरह से सुचारू रूप से चल रहा है।”
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महंत ने आगे कहा, “आपसी सद्भाव और प्रेम कायम है। राम जी सब कुछ देख रहे हैं, लोग चाहे जो कहें। ट्रस्ट कभी भी ऐसी (गबन की) गलती नहीं करेगा।”
SBI और ट्रस्ट कर रहे हैं ऑडिट: चंपत राय
गड़बड़ी के दावों पर विराम लगाते हुए मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि वित्तीय मामलों में किसी भी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं है।
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राय ने अपने बयान में कहा, “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट समय-समय पर नियमित रूप से आंतरिक लेखापरीक्षा (Internal Audit) कराता है। यह ऑडिट ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा किया जाता है।”
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उन्होंने बताया कि यह लेखापरीक्षा प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है और वर्तमान में भी जारी है। अब तक की जांच में कोई भी उल्लेखनीय अनियमितता या गड़बड़ी सामने नहीं आई है।
अखिलेश यादव ने क्या लगाए थे आरोप?
इससे पहले, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया (पोस्ट) के जरिए राम मंदिर के चंदे में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के गबन का आरोप लगाते हुए राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी।
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यादव ने इस मामले में केंद्र सरकार की ‘संदिग्ध चुप्पी’ पर सवाल उठाए थे।
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उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने का आह्वान करते हुए कहा था, “न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग है, क्योंकि यह मामला वैश्विक स्तर पर संपूर्ण ‘सनातन समुदाय’ की भगवान राम में गहरी आस्था से सीधा जुड़ा हुआ है।”











