वोमनिया पहल क्या है

सरकारी बाजार में ‘नारी शक्ति’ की धमक: ‘वोमनिया’ के 7 साल, 2 लाख महिला उद्यमियों ने किया 80,000 करोड़ का कारोबार

जीईएम (GeM) ने मनाया जश्न: 3% का लक्ष्य पीछे छोड़ा, कुल सरकारी खरीद में अब महिलाओं की हिस्सेदारी 4.7% पहुंची

विशेष संवाददाता | नई दिल्ली

बिचौलियों का राज खत्म कर सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाने वाले ‘सरकारी ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) ने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है।

महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई इसकी विशेष पहल ‘वोमनिया’ (Womaniya) ने अपने गौरवशाली 7 वर्ष पूरे कर लिए हैं।

नई दिल्ली के जीवन भारती बिल्डिंग में आयोजित समारोह में यह खुलासा हुआ कि सरकारी बाजार अब केवल पुरुषों का वर्चस्व नहीं रहा, बल्कि महिला उद्यमी यहां नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं।

आंकड़े बोल रहे सफलता की कहानी

जीईएम द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 14 जनवरी 2026 तक की स्थिति यह बताती है कि यह पहल कितनी सफल रही है:

  • पंजीकरण: पोर्टल पर 2 लाख से अधिक महिला नेतृत्व वाली सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (MSEs) पंजीकृत हो चुकी हैं।

  • कारोबार: इन महिला उद्यमियों ने सामूहिक रूप से 80,000 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी ऑर्डर हासिल किए हैं।

  • लक्ष्य से आगे: सरकार ने महिला उद्यमियों के लिए 3% खरीद का लक्ष्य रखा था, लेकिन ‘वोमनिया’ की सफलता ने इसे 4.7% तक पहुंचा दिया है।

2019 से 2026: एक सुलभ मंच से ‘इकोसिस्टम’ तक

‘वोमनिया’ की शुरुआत 14 जनवरी 2019 को हुई थी। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) और महिला उद्यमियों को सरकारी बाजार तक सीधी पहुंच देना था।

जीईएम के सीईओ श्री मिहिर कुमार ने इस अवसर पर कहा,

“वोमनिया अब महज एक पहल नहीं, बल्कि एक सुसंगठित पारिस्थितिकी तंत्र बन चुका है। इसने महिलाओं को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे सरकार के साथ व्यापार करने का डिजिटल रास्ता दिखाया है।”

नया समझौता: अब और मिलेगी मदद

इस मौके पर महिला उद्यमियों की मदद के लिए एक और बड़ा कदम उठाया गया। जीईएम (GeM) और महिला सामूहिक मंच (WCF) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

  • हस्ताक्षरकर्ता: जीईएम के अतिरिक्त सीईओ श्री अजीत बी. चव्हाण और डब्ल्यूसीएफ की मुख्य सामुदायिक अधिकारी सुश्री ऋचा शर्मा।

  • उद्देश्य: यह साझेदारी महिलाओं को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन, डॉक्यूमेंटेशन और टेंडर प्रक्रिया समझने में मदद करेगी। साथ ही, उनके लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

नीति निर्माताओं ने सराहा

कार्यक्रम में एमएसएमई मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मर्सी एपाओ और संयुक्त राष्ट्र (UN) की प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की।

वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता में लैंगिक समावेशन (Gender Inclusion) सबसे अहम है।

वक्ताओं ने माना कि नीतिगत समर्थन और डिजिटल पहुंच ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को नई उड़ान दी है।

निष्कर्ष

7 साल का यह सफर बताता है कि अगर सही मंच मिले, तो महिलाएं किसी से कम नहीं हैं। ‘वोमनिया’ ने न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, बल्कि यह साबित किया है कि डिजिटल इंडिया का असली फायदा जमीनी स्तर पर कैसे उठाया जा सकता है।

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