विचार प्रवाह – इस्लामिक जिहाद का नया गढ़ बनता जा रहा है हिमाचल और उत्तराखंड

“सांकेतिक चित्र “

“हिमालय की गोद में बसे भारत के दो छोटे राज्य हिमाचल और उत्तराखंड सनातन ऋषि परम्परा के साक्षी कहे जाते हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले वाले ये राज्य प्रायः ही प्राकृतिक आपदाओं से जूझते हैं किंतु अब यह दोनों ही राज्य इस्लामिक जिहाद का गढ़ भी बनते जा रहे हैं”

नई दिल्ली 11 / 09 / 2024 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

दोनों ही राज्यों में बांगलादेशी व रोहिंग्या का दायरा बढ़ता जा रहा है। घुसपैठिये धीरे-धीरे जल, जंगल और जमीन के साथ लव जिहाद तथा अन्य माध्यमों निरंतर धर्मान्तरण का प्रयास भी कर रहे हैं।

दोनों ही राज्य हिन्दू संस्कृति की दृष्टि से भीषण खतरे में हैं। हिमाचल के जिस क्षेत्र में जहां 95 प्रतिशत हिंदू आबादी रहा करती थी वहां पर पांच मंजिल की अवैध मस्जिद बन चुकी है, मस्जिद में आने वाले मुसलमानों ने स्थानीय हिन्दू परिवारों का जीना दूभर कर दिया है, हिन्दू सड़क पर हैं लेकिन सरकार सो रही है।

प्रश्न है कि आखिर वे कौन से तत्व हैं जो इन प्रदेशो को बरबाद करने पर तुले हुए हैं? उत्तराखंड और हिमाचल दोनो ही राज्य कानून और व्यवस्था के मामले में अच्छे राज्य गिने जाते थे।

चोरी-चकारी, छीना-झपटी जैसी चीजें वहां होती ही नहीं थीं किंतु घुसपैठियों की बढती संख्या के साथ साथ अब आपराधिक घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है।

दोनों ही राज्यों में अवैध मस्जिदों और मजारों को लेकर लगातार विवाद हो रहे हैं। उत्तराखंड के जंगलों में अवैध मजारें बना दी गईं। 

जब सरकारी प्रशासन को पता चला तो वहां पर बुलडोजर चला कर मजारों को ध्वस्त किया गया। ये सभी मजारें अवैध और सुनियोजित साजिश के तहत जमीन जिहाद का एक हिस्सा थीं।

इसी क्रम में ताजा प्रकरण हिमांचल प्रदेश के संजौली का है, जहां एक पांच मंजिला अवैध मस्जिद निर्माण को लेकर स्थानीय जनता आंदोलन कर रही है और सुरक्षा कारणों से कांग्रेस सरकार से मस्जिद को ध्वस्त करने की मांग कर रही है क्योंकि मामला कोर्ट में भी है इसलिए प्रशासन आराम से बैठा है।

संजौली की यह मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है यह राजधानी शिमला के माल रोड से लगभग पांच किलोमीटर दूर है।

इस मस्जिद में आने वाले मुसलमाओं में बड़ी संख्या में रोहिंग्या होने के आरोप हैं। अगर ये आरोप सही है तो प्रश्न उठता है कि बांग्लादेश से आने वाले रोहिंग्या 95 प्रतिशत आबादी वाले हिंदू इलाके में पहुंच कैसे गये?

महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार के मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने ही विधानसभा में इस मस्जिद को अवैध बताया और इसे गिराने की मांग करते हुए कहा कि संजोली बाजार में महिलाओं का चलना मुश्किल हो गया है, चोरियां हो रही हैं, लव जिहाद जैसी घटनाएं हो रही हैं जो प्रदेश के लिए खतरनाक हैं।

दूसरी ओर वक्फ बोर्ड कह रहा है कि ये जमीन सरकार की नहीं अपितु उसकी है। तथ्य ये है कि वर्ष  1967 के सरकारी दस्तावेज इस बात की पुष्टि करते हैं कि ये जमीन सरकार की थी।

कुछ सालों पहले तक यह छोटी सी मस्जिद थी जो अब पांच मंजिल की बन चुकी है। मस्जिद का मामला कोर्ट में 14 वर्षों से विचाराधीन है और मुकदमे की 44 बार सुनवाई हो चुकी है।

हिमाचल का संजोली मस्जिद विवाद गहरा जाने के बाद यह बात जोर पकड़ रही है कि क्या पर्वतीय प्रदेशों में जनसांख्यिकीय सतुंलन बदलने का सुनियोजित षड्यंत्र चल रहा है?

दोनों ही प्रान्तों में मुसलमानों, मजारों और मस्जिदों की संख्या तेजी से बढ़ रही है? इन प्रान्तों में हिन्दुओं की आबादी लगातर कम हुई है जबकि मुसलमानों की आबादी में लगातार वृद्धि हुई है।

वर्ष 1951 में हिमांचल प्रदेश में  हिन्दुओ की आबादी 98.14 प्रतिशत  थी जो वर्ष 2011 में 95.2 प्रतिशत  हो गई थी।

अलग-अलग समय की जनगणना से ये पता चलता है कि जहां एक तरफ हिमांचल प्रदेश में हिन्दुओं की आबादी लगातार कम हुई है और  वहीं मुसलमानों की आबादी लगातार बढ़ रही है।

वर्ष 2011 से हमारे देश में जनगणना नहीं हुई है और पिछले 13 वर्षो में हिमाचल प्रदेश की डेमोग्राफी कितनी बदली हे अभी इसके सटीक आंकड़े हमारे पास उपलब्ध नहीं हैं। 

चार साल में बढ़ गई 12 मस्जिदें

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 10 से 12 वर्षों में मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ी है और इसका अनुमान हिमांचल में बनी नई मस्जिदों से लगाया जा सकता है।

हिमांचल प्रदेश हिंदू जागरण मंच का दावा है कि कोविड से पहले प्रदेश में 393 मस्जिदें थीं जिनकी संख्या कोविड के बाद 520 हो गईं।

इन सभी 127 मस्जिदों का निर्माण कोविड के समय हुआ था। ज्ञातव्य है कि कोविड के दौरान लाकडाउन के समय नियमों को तोड़ने की सबसे अधिक घटनाएं मुस्लिम सम्प्रदाय द्वारा ही की गई थीं। 

हिमांचल की राजधानी शिमला में पहली बार सांम्प्रादायिक तनाव की स्थिति पैदा हुई है और हिन्दू जनमानस को अपनी सुरक्षा के लिए सड़क उतरना पड़ा है।

हिन्दुओं की एकमात्र मांग है कि पांच मंजिला अवैध मस्जिद को ध्वस्त किया जाये ओर बांग्लादेशी व रोहिंग्याओ घुसपैठियों को बाहर किया जाये।

अब कांग्रेस सरकार के मंत्री ही अपनी सरकार से विनती कर रहे हैं कि इस बात की जांच कराई जाए कि अचानक प्रदेश में बाहरी मुसलमानों की संख्या कैसे बढ़ गई?

रेहड़ी पटरी और बाजारों पर रोहिंग्या मुसलमानों का कब्जा कैसे हो गया? इस पर  मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने ही मंत्री को नसीहत दे डाली कि मंत्रियों व विधयाकों को इस तरह के मामलों में नहीं पड़ना चाहिए। 

आंदोलनकारी जनता कह रही है, अगर सरकार इस मस्जिद को नहीं गिराती हे तो वह स्वयं आगे आगे आकर इसे गिरा देंगे।

ज्ञातव्य है कि शिमला में ढाई मंजिलसे अधिक ऊँची इमारत बनाने पर प्रतिबन्ध है। देवभूमि क्षेत्रीय संगठन के नेतृत्व तले प्रदर्शनकारियों ने ये यह साफ कर दिया है कि उन्हें शिमला के स्थानीय मुसलमानों से कोई परेशानी नहीं है लेकिन रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमान समस्या बन गये हैं। 

प्रदर्शनकारी  महिलाओं का कहना है कि शिमला की सड़कों पर लगने वाली दुकानों पर रोहिंग्या मुसलमानों ने कब्जा कर लिया है वे हिन्दुओं को दुकानें नहीं लगाने देते, बहन बेटियों को छेड़ते हैं, विरोध करने पर खून खराबे पर उतर आते हैं। 

फैसला होगा उसका पालन सरकार करायेगी?

अब इस  प्रकरण पर सभी मुस्लिम हितैषी कूद पड़े हैं, एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने राहुल गांधी से सवाल पूछा कि, “मुहब्बत की दुकान में इतनी नफरत कहां से आ गई?

मस्जिद का मुकदमा कोर्ट में है तो हिंदू उसे गिराने की मांग कर रहे हैं, कांग्रेस के मंत्री उनकी बातों का समर्थन कर रहे हैं।

टीवी चैनलों व सोशल मीडिया पर भी बहस प्रारम्भ हो गई है। हर बार की तरह उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी व अन्य क्षेत्रीय दल बहसो में जोरदार ढंग से मुस्लिम तुष्टिकरण कर रहे हैं।

संविधान के रक्षक इंडी गठबंधन के सभी दल अवैध मस्जिद को वैध बता रहे हैं और बयान दे रहे हैं कि भारत में कोई भी व्यक्ति कहीं भी किसी भी स्थान पर रह सकता है। 

इन परिस्थितियों से स्पष्ट प्रतीत प्रतीत हो रहा है कि भारत में अवैध नागरिकों का प्रवेश कांग्रेस व इंडी गठबंधन के लोग ही करा रहे हैं और डेमोग्राफी बदलने की साजिश रच रहे हैं।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस मंत्री अनिरूद्द सिंह लव जिहाद और रोहिंग्या घुसपैठियों जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके भाजपा की जुबान बोल रहे हैं। 

उत्तराखंड में चार जिलों में डेमोग्राफिक बदलाव

उत्तराखंड के चार जिलों में भी तीव्रता के साथ डेमोग्राफिक बदलाव देखने को मिल रहा है। चार मैदानी जिलों हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और देहरादून में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी है।

वर्ष 2001 में हरिद्वार में हिन्दुओं की आबादी 65.3 प्रतिशत जो 2011 में घटकर 64.3 प्रतिशत रह गई जबकि मुसलमानों की आबादी में 1.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और ये 33 से 34.3 प्रतिशत तक पहुंच गई।

इसी प्रकार देहरादून में हिन्दुओं की आबादी 0.7 प्रतिशत घट गई। विगत 10 वर्षों में ऊधम सिंह नगर में हिन्दुओं की आबादी 0.4 प्रतिशत कम हो गई जबकि मुसलमानों की आबादी 2 प्रतिशत बढ़ गई।

उत्तराखंड में भी अपराध बढ़ गये हैं जिसमें बालिकाओं के साथ दुष्कर्म व छेड़छाड़, लव जिहाद, लोगों के पर्स व मोबाइल आदि छीनकर भाग जाना, बाजारों में चोरी चकारी जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ गई हैं।

अभी हाल ही में कुछ भगवाधारी नकली साधुओं को पकड़ा गया जो वास्तव में बांग्लादेशी रोहिंग्या निकले।

एक नकली बाबा बद्रीनाथ धाम को बदरुद्दीन की मजार बता रहा था। हिंदू आस्था के सबसे बड़े केंद्रों को नकली भगवा चोला ओढ़कर मजार व मस्जिद बताया जा रहा है इससे बड़ा षड्यंत्र और क्या होगा?

यही नकली बाबा धार्मिक स्थलों पर माहौल खराब करने की भी साजिश रच रहे हैं। अब यह समय हिन्दुओं के लिए सतर्कता व सजगता का है।

श्यामपुर उत्तराखण्ड का एक सुंदर सा गाँव हैं। वहाँ सभी लोग सुख-शांति से अपना जीवन यापन कर रहे होते हैं। अचानक वहां गाँव के किनारे पर एक फ़क़ीर आकर मिट्टी का एक ढेर बनाता है उस पर चादर डालता है और फिर उसके बग़ल में एक झोपड़ी बनाकर रहने लग जाता है।

अब श्यामपुर के लोग आते जाते लोगों को वह फ़क़ीर या मज़ार का ख़ादिम बहलाता-फुसलाता है और लोग वहाँ माथा टेकने लगते हैं।

लोगों की श्रद्धा को बढ़वाकर वह ख़ादिम दूसरे चरण में भोले-भाले ग्रामीणों से कहता है कि वे अपने खेत में ही एक छोटे से कोने कहीं मज़ार बना देंगे तो वह आकर उस मज़ार पर नमाज़ पढ़कर उसे भी सिद्ध बना देगा।

ख़ादिम के बहकावे में आकर वह ग्रामीण ऐसा ही करता है और अपने खेत में मज़ार बनाकर वहाँ प्रतिदिन दिया-बत्ती करने लग जाता है।

लोगों का आना जाना बढ़ता है तो वहाँ एक दानपेटी रख दी जाती है। अब ख़ादिम हर सप्ताह आकर उस दानपेटी से राशि निकालकर ले जाता है।

शनैः-शनैः वह ख़ादिम, उसी ग्रामीण के पैसों से मज़ार पर टिन डलवा देता है उसे पक्का निर्माण करवा देता है।

इधर मज़ार पर लोगों का आना-जाना बढ़ता है उधर गाँव में कुछ और मुस्लिम परिवार आकर बसने लगते हैं और मज़ारें भी बढ़ने लगती है।

अचानक गाँव में लव जिहाद की घटनाएँ बढ़ने लगती हैं। गाँव की लड़कियों मुस्लिम लड़कों के झाँसे में आकर अपना सर्वस्व उन्हें सौंपने लगती है।

अब गाँव में कभी गर्भस्थ होने से, कभी इज्जत के डर से, कभी मज़ार के ख़ादिम के नाराज़ होने के डर से तो कभी बाहुबल के सहारे हिंदू लड़कियां मुस्लिम लड़कों से निकाह करने लगती हैं।

कभी-कभी तो इस कार्य में हिंदू लड़कियों के परिवार भी दबाव में आकर सहमति देने लगते हैं। इस कथा में केवल गाँव का नाम काल्पनिक है बाक़ी सब जो लिखा है वह उत्तराखण्ड के कई-कई ग्रामों की स्थिति का सच्चा कच्चा-चिट्ठा है।

उत्तराखण्ड में लैंड जिहाद, लव जिहाद, मतांतरण, व्यापार जिहाद इसी प्रकार हज़ारों ग्रामों में अपने पैर पसार चुका है।

इस प्रकार की घटनाओं के बढ़ते जाने पर उत्तराखण्ड की पुष्कर सिंह धामी की सरकार इन घटनाओं का संज्ञान लेती है और स्थिति को समझती है।

बात बहुत आगे बढ़ चुकी होती है किंतु पुष्कर सिंह इसे अपनी तेज कार्य योजना से रोकने का प्रयास कर रहे हैं।

उत्तराखण्ड सरकार का बुलडोज़र चलने लगता है और ऐसी सैकड़ों नक़ली मज़ारों पर बुलडोज़र चलाकर मज़ारों को ध्वस्त करके मज़ार के आसपास क़ब्ज़ा की गई सैंकड़ों-हज़ारों एकड़ ज़मीन को भी इन ख़ादिमों से मुक्त कराता है।

अब शासन-प्रशासन के देखने में यह भी आता है कि शासकीय ही नहीं बल्कि निजी ज़मीन पर भी ये दिखावटी और अपराधी प्रकार के ख़ादिम मज़ारों के सहारे क़ब्ज़ा किए बैठे होते हैं।

इन ज़मीनों के हिंदू जनजातीय स्वामी इन अपराधी ख़ादिमों के बहकावे में आकर, जिन्न-जिन्नात के प्रकोप के भय से अपनी ज़मीनें, पैसा, लड़कियां सब कुछ इन अपराधी ख़ादिमों को दे रहे होते हैं।

पिछले दिनों देहरादून के समीप पछुवा नामक ग्राम में ऐसे दो प्रकरण देखने में आए थे, जब अवैध मजार को हटाने गये प्रशासन को हिंदू समाज के जनजातीय और अनुसूचित जाति के लोगों ने रोकने का प्रयास किया।

इन भोले-भाले हिंदू ग्रामीणों का कहना था कि ये मज़ारें तो उन्होंने स्वयं अपनी मन्नत पूर्ण होने पर बनवाई है।

प्रशासन जब मामले की गहराई में गया तो ग्रामीणों ने बताया कि – उनको किसी कष्ट के निवारण के लिए ख़ादिम ने मजार पर बुलाया तो वे गये थे।

इसके बाद वहाँ के ख़ादिम ने उन्हें बहला-फुसलाकर मन्नत करवा ली और उनसे कहा कि “आप की इच्छा पूरे होने पर चादर चढ़ाना और अपनी जमीन पर बाबा का मजार बनवा देना फिर आपको इतनी दूर यहाँ आने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी और मज़ार के कारण आपका खेत भी दोगुनी उपज देने लगेगा।”

कहीं-कहीं तो इन अपराधी ख़ादिमों ने भोले-भाले ग्रामीणों से उनके मंदिरों को ही मज़ार में बदल देने और पूजा पद्धति को बदलने हेतु भयभीत करके तैयार करवा लिया था।

कई स्थानों पर निजी ज़मीनों पर बनी इन मज़ारों के पास अन्य मुस्लिम परिवार मित्र बनकर बस जाते और इसके बाद सभी प्रकार के अपराध वहाँ होने लगते।

भोले भाले जनजातीय और अनुसूचित जाति के हिंदू ग्रामीण अपनी ज़मीन और लड़कियों को अपने हाथों से छूटते हुए देखते और हाथ मलते ही रह जाते थे।

उत्तराखण्ड की पुलिस ने जब इन मज़ारों की जाँच की तो इसके पीछे एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने की बात सामने आई।

यह गिरोह बेरोज़गार मुस्लिमों को ख़ादिमों के कपड़े पहनवाकर, थोड़ा-बहुत बोलने और झाड़ने फूंकने का प्रपंच सिखाकर लैंड जिहाद व लव जिहाद हेतु तैयार करवाकर इस प्रकार की घटनाएँ करवाता था और बड़ी मात्रा में आस्था के नाम पर लोगों से पैसा भी निकलवा लेता था।

बड़ी संख्या में इन मज़ारों पर हिंदू बंधु जाने लगते और धन, संपत्ति, ज़ेवर, खाद्यान्न, फल आदि चढ़ाने लगते।

इस चढ़ावे से फलते-फूलते वहाँ के ख़ादिम अपनी मज़ार की दूसरी-तीसरी-चौथी ब्रांच खोलते जाते थे।

कालू शाह, भूरे शाह, बुल्ले शाह और न जाने कौन-कौन से शाहों के नाम पर पर ये मज़ारें बनाई जाती और कमाई होने पर यहाँ के अपराधी ख़ादिम बग़ल के गाँव में जाकर अपनी फ़्रेंचायजी जैसी एक और मज़ार बनवा लेते थे।