AI Curriculum Restructure Ashwini Vaishnaw

B.Tech AI सिलेबस में होगा बड़ा बदलाव, मंत्री अश्विनी वैष्णव की अहम बैठक

AI एजुकेशन में होगा बड़ा बदलाव : B.Tech का बदलेगा सिलेबस, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की हाई-लेवल मीटिंग”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में ‘ग्लोबल हब’ बनाने और युवाओं को उभरती तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से मोदी सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है।

भारत सरकार एआई (AI) पाठ्यक्रम (Syllabus) के व्यापक पुनर्गठन के लिए उद्योग जगत (Industry) के साथ मिलकर काम कर रही है।

इसी कड़ी में, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में ‘एआई पाठ्यक्रम कार्यबल’ (AI Curriculum Taskforce) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की है।

इस टास्कफोर्स ने नैसकॉम (NASSCOM) और उद्योग विशेषज्ञों के सहयोग से भारतीय शिक्षण संस्थानों में मौजूदा बी.टेक (B.Tech – Computer Science) और संबद्ध पाठ्यक्रमों का गहरा अध्ययन किया है।

मौजूदा सिलेबस में क्या मिलीं कमियां?

अध्ययन में यह बात सामने आई है कि हालांकि भारतीय पाठ्यक्रमों में एआई का दायरा बढ़ा है, लेकिन अभी भी जनरेटिव एआई (Generative AI), मशीन लर्निंग ऑपरेशंस (MLOps) और मूलभूत मॉडल विकास जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में ‘प्रैक्टिकल नॉलेज’ और बुनियादी ढांचे की भारी कमी है। शिक्षण पद्धति अभी भी किताबी अधिक और व्यावहारिक कम है।

पाठ्यक्रम में बदलाव के मुख्य फोकस क्षेत्र:

टास्कफोर्स ने एआई एजुकेशन को पूरी तरह से ‘इंडस्ट्री-रेडी’ बनाने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं:

  • प्रैक्टिकल पर जोर: वर्तमान में एआई कोर्स में केवल 25-30 प्रतिशत व्यावहारिक (Practical) अनुभव मिलता है, जिसे बढ़ाकर 40-75 प्रतिशत तक किया जाएगा।

  • पहले दिन से रियल-वर्ल्ड लर्निंग: पहले सेमेस्टर से ही ‘लेक्चर-आधारित’ पढ़ाई की जगह ‘एप्लीकेशन और इंडस्ट्री-केस’ आधारित पढ़ाई पर शिफ्ट किया जाएगा।

  • जिम्मेदार AI: एआई एथिक्स और गवर्नेंस को अलग विषय न रखकर, इसे सभी सेमेस्टरों में अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा।

  • मल्टीपल एंट्री-एग्जिट: नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को पहले वर्ष के बाद प्रमाणपत्र (Certificate), दूसरे वर्ष के बाद डिप्लोमा और तीसरे वर्ष के बाद एडवांस्ड डिप्लोमा का विकल्प मिलेगा।

टीचर्स की ट्रेनिंग और ‘शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर’ पर जोर

सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि पढ़ाने वाले शिक्षकों (Faculty) की क्षमता निर्माण के लिए भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।

  • शिक्षकों के लिए एक संरचित ‘ट्रेन-द-ट्रेनर’ (Train-the-Trainer) प्रोग्राम चलाया जाएगा।

  • कॉर्पोरेट और इंडस्ट्री के अनुभवी पेशेवरों को बिजनेस स्कूलों की तर्ज पर ‘सहायक संकाय’ (Adjunct Faculty) के रूप में कॉलेजों में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

  • कॉलेजों में ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU), एज डिवाइस और सॉफ्टवेयर स्टैक तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक ‘राष्ट्रीय स्तर का साझा एआई अवसंरचना’ (National Shared AI Infrastructure) नेटवर्क बनाया जाएगा।

नॉन-इंजीनियरिंग छात्रों को भी मिलेगी AI की शिक्षा

परामर्श के अंत में तय किया गया है कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के साथ मिलकर वर्तमान बैचों के 5वें से 8वें सेमेस्टर में इस नए सिलेबस को लागू किया जाएगा।

सबसे अहम बात यह है कि ‘गैर-स्टेम’ (Non-STEM) यानी आर्ट्स और कॉमर्स जैसे विषयों के छात्रों के लिए भी ‘बेसिक एआई लिटरेसी’ (AI Literacy) और इसके व्यावहारिक उपयोग का एक अलग कोर्स शुरू किया जाएगा, ताकि देश का हर छात्र एआई युग के लिए तैयार हो सके।