पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर में 'पश्चिमबंगा दिवस' समारोह के दौरान पीएम मोदी ने 9.44 करोड़ किसानों के लिए 18,880 करोड़ रुपये की 'पीएम-किसान' सम्मान निधि जारी की और कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया।
तारकेश्वर में ‘पश्चिमबंगा दिवस’ पर गरजे पीएम मोदी: किसानों को दी 18,880 करोड़ की सौगात, कांग्रेस-टीएमसी और लेफ्ट पर किया करारा प्रहार”
तारकेश्वर (पश्चिम बंगाल): द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर में ‘पश्चिमबंगा दिवस’ के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के विकास को नई रफ्तार देने का शंखनाद किया।
चुनाव और नई सरकार के गठन के बाद पहली बार बंगाल पहुंचे पीएम मोदी ने जहां एक तरफ देश के किसानों के लिए खजाना खोला, वहीं दूसरी तरफ दशकों तक राज्य की सत्ता में रहे राजनीतिक दलों (कांग्रेस, लेफ्ट और टीएमसी) पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया।
इस भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने ‘पीएम-किसान’ योजना (PM-Kisan Scheme) की 23वीं किस्त जारी कर 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में सीधे 18,880 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए।
विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल की हवा में अब एक नई ताजगी और खुशबू है।
उन्होंने कहा, “ऐसा लग रहा है जैसे बंगाल अब बेड़ियों से आजाद हो गया है। बंगाल के गौरव के लौटने का आरंभ हो गया है।”
उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उनके एक वोट ने बंगाल में जो परिवर्तन किया है, वह आज साफ नजर आ रहा है।
प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक पहले लेफ्ट (वामपंथियों) और फिर टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) ने बंगाल के विकास में जो गड्ढे बनाए थे, उन्हें भरने के लिए अब ‘डबल इंजन की सरकार’ सुपर-फास्ट स्पीड से काम कर रही है।
विकास परियोजनाओं की सौगात: कार्यक्रम में रेल, सड़क, कृषि और मछली पालन से जुड़ी सैकड़ों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया।
चुनावी गारंटी हुई पूरी: पीएम ने याद दिलाया कि उन्होंने चुनाव में ‘आयुष्मान भारत योजना’ की गारंटी दी थी। अब बंगाल के हर गरीब को इसका लाभ मिलना तय हो गया है। साथ ही माताओं-बहनों के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ भी शुरू कर दी गई है।
पीएम मोदी ने बंगाल के इतिहास और वर्तमान हालात का जिक्र करते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा:
विभाजन और तुष्टिकरण: “विभाजन के समय जो कांग्रेस बंगाल को लावारिस छोड़ना चाहती थी, उसने बचे हुए बंगाल में भी तुष्टिकरण का खेल खेला।”
घुसपैठियों का अड्डा: “पहले कांग्रेस, फिर लेफ्ट और फिर टीएमसी ने पश्चिम बंगाल को सहेजने की जगह इसे अवैध घुसपैठियों का अड्डा बनने दिया। संसाधनों पर घुसपैठियों का कब्जा होता गया और युवाओं का रोजगार छिनता गया।”
पलायन का दर्द: अवसरों की भूमि रहा पश्चिम बंगाल कुशासन के कारण पलायन का केंद्र बन गया और यहां से बड़े उद्योगों को बाहर जाना पड़ा।
प्रधानमंत्री ने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और ईश्वरचंद्र विद्यासागर जैसी महान विभूतियों को नमन किया। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इस पवित्र धरती पर विदेशी विचारधाराएं थोपी गईं।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करते हुए पीएम ने कहा कि चूंकि वे जनसंघ के संस्थापक थे, इसलिए जानबूझकर उनके योगदान को नकारा गया और उनके विचारों को खत्म करने की कोशिश की गई।
लेकिन अब भाजपा-एनडीए सरकार बंगाल की महान आत्माओं के सपनों को सच्चाई में बदल रही है।
अंत में प्रधानमंत्री ने ‘स्वच्छता से स्वागत’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि जहां स्वच्छता होती है, वहां विकास का स्वरूप भी बेहद सुंदर दिखाई देता है।
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