MOSPI Report

दशकों बाद असंगठित निर्माण क्षेत्र का सर्वे, 98 लाख परिवारों ने बनाए घर

MOSPI का ऐतिहासिक सर्वे : दशकों बाद असंगठित निर्माण क्षेत्र का खुलासा, 98.54 लाख परिवारों ने खुद बनाए अपने घर 

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन ; संतोष सेठ की रिपोर्ट 

अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले निर्माण (Construction) क्षेत्र पर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MOSPI) ने दशकों में पहली बार एक अहम और विस्तृत रिपोर्ट जारी की है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा किए गए इस ‘मार्गदर्शी अध्ययन’ (Pilot Study) ने भारत के अनिगमित (असंगठित) निर्माण क्षेत्र और घरेलू निर्माण गतिविधियों की एक स्पष्ट तस्वीर देश के सामने रखी है।

98 लाख से ज्यादा परिवारों ने खुद किया निर्माण

सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 365 दिनों की संदर्भ अवधि में देश के लगभग 98.54 लाख परिवारों ने अपने स्वयं के उपयोग के लिए ‘स्व-खाता निर्माण’ (Own-account construction) का कार्य किया।

इसके अलावा, अनिगमित (असंगठित) क्षेत्र में करीब 10.27 लाख निर्माण एजेंसियां सक्रिय पाई गईं। रोजगार के मोर्चे पर भी यह क्षेत्र अहम साबित हुआ है, क्योंकि इनमें से लगभग 77 प्रतिशत निर्माण एजेंसियों ने नियमित आधार पर कम से कम एक कर्मचारी को रोज़गार दिया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ा बैंकों पर भरोसा

रिपोर्ट का एक बेहद सकारात्मक पहलू ग्रामीण क्षेत्रों में औपचारिक ऋण (Institutional Finance) तक बढ़ती पहुंच है।

निर्माण कार्य करवाने वाले लगभग 23% ग्रामीण परिवारों ने बैंकों या वित्तीय संस्थानों से लोन लिया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 13% रहा।

हालांकि, औसतन 97% परिवारों ने निर्माण के लिए मुख्य रूप से अपनी खुद की आय का इस्तेमाल किया।

कहां खर्च हो रहा है सबसे ज्यादा पैसा?

घरेलू निर्माण में खर्च की संरचना भी दिलचस्प है। कुल खर्च का लगभग 75% हिस्सा केवल निर्माण सामग्री पर खर्च होता है, जबकि 22% हिस्सा मज़दूरी में जाता है। निर्माण सामग्री में भी सबसे बड़ा हिस्सा (करीब 60%) ईंट, सीमेंट और लोहे/स्टील का है।

अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान

इस अध्ययन के अनुसार, बाज़ार में काम करने वाली प्रति अनिगमित निर्माण एजेंसी का सकल मूल्यवर्धन (GVA) लगभग 7.98 लाख रुपये और कुल उत्पादन 16.25 लाख रुपये आंका गया है। इन एजेंसियों के पास औसतन ₹5.21 लाख की स्थायी संपत्ति (Fixed Assets) भी मौजूद है।

MOSPI की यह रिपोर्ट राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी (National Accounts) को और सटीक बनाने में एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगी, क्योंकि अब तक इस असंगठित क्षेत्र के विश्वसनीय आंकड़े न के बराबर थे।

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