PM Narendra Modi sharing a Sanskrit Subhashita on the importance of thoughtful decision making

सोच-समझकर फैसले लेने से मिलती है सफलता: पीएम मोदी

🕉️ “बिना सोचे-समझे न करें कोई काम…” PM मोदी ने ‘संस्कृत सुभाषित’ के जरिए दिया सफलता का मंत्र, बताया कैसे आती है समृद्धि?

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

जीवन में सफलता कैसे हासिल की जाए और संकटों से कैसे बचा जाए? इसे लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने देशवासियों और विशेषकर युवाओं के साथ एक बहुत ही गहरा और प्रेरक संदेश साझा किया है।

प्रधानमंत्री ने प्राचीन भारतीय ज्ञान का उदाहरण देते हुए एक ‘संस्कृत सुभाषित’ के माध्यम से धैर्य, विवेक और दूरदर्शिता के महत्व पर प्रकाश डाला है।

‘The Politics Again’ की इस रिपोर्ट में आइए जानते हैं पीएम मोदी द्वारा साझा किए गए उस संस्कृत श्लोक का अर्थ और उनके द्वारा दिया गया सफलता का मूल मंत्र:

📜 पीएम मोदी ने साझा किया यह श्लोक

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि सुख और समृद्धि के द्वार केवल उन्हीं कार्यों से खुलते हैं, जो धैर्य और समझदारी से किए जाते हैं। उन्होंने इस प्राचीन संस्कृत सुभाषित को साझा किया:

“सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्। वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥”

💡 क्या है इस श्लोक का अर्थ और संदेश?

इस संस्कृत सुभाषित का अर्थ समझाते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि किसी भी कार्य को बिना सोचे-समझे या जल्दबाजी में प्रारंभ नहीं करना चाहिए।

  • जल्दबाजी है संकट का कारण: अविवेकपूर्ण (बिना सोचे-समझे) किए गए कार्य बड़ी आपदाओं और संकटों को सीधा निमंत्रण देते हैं।

  • सफलता खुद चुनती है रास्ता: इसके विपरीत, जो व्यक्ति प्रत्येक कार्य को सोच-विचार कर और दूरदर्शिता के साथ करता है, सफलता और समृद्धि (सम्पदः) स्वयं उसके गुणों पर मुग्ध होकर उसका चुनाव कर लेती है।

🎯 ‘हर निर्णय में पूरी समझदारी जरूरी’

अपने पोस्ट में पीएम मोदी ने यह स्पष्ट किया कि जीवन या कामकाज के हर निर्णय के लिए गहन समझ आवश्यक है।

उन्होंने लिखा, “धैर्य, विवेक और दूरदर्शिता से किए गए कार्यों से ही सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। इसलिए हर निर्णय में पूरी समझदारी जरूरी है, क्योंकि सोच-समझकर उठाया गया कदम ही सफलता का आधार बनता है।”

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर भारत के प्राचीन ग्रंथों, वेदों और संस्कृत साहित्यों का हवाला देकर आधुनिक जीवन की समस्याओं का समाधान बताते रहे हैं।

उनका यह ताजा संदेश भी इसी बात पर जोर देता है कि डिजिटल युग की इस भागदौड़ में भी हमें कोई भी निर्णय लेने से पहले ठहरकर विचार जरूर करना चाहिए।

नोट: प्रधानमंत्री मोदी के प्रेरक संदेशों, भारतीय संस्कृति और देश की राजनीति से जुड़ी हर सकारात्मक व प्रामाणिक खबर के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।

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