जौनपुर न्यायालय: 4 दशक पुराने मुकदमे का सुलह-समझौते से निस्तारण
जौनपुर में सुलह-समझौते की बड़ी मिसाल: 4 दशक पुराने मुकदमे का ‘मध्यस्थता’ से हुआ सफल निस्तारण, आपसी सहमति से खत्म हुआ विवाद”
The Politics Again डेस्क: वरुण यादव
उत्तर प्रदेश के जौनपुर न्यायालय से न्याय और आपसी सौहार्द की एक बड़ी मिसाल सामने आई है। अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने और लोगों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए चलाए जा रहे ‘मध्यस्थता अभियान’ के तहत जौनपुर में लगभग 4 दशक (40 साल) पुराने एक दीवानी मुकदमे का सुलह-समझौते के माध्यम से सफल निस्तारण किया गया है।
दोनों पक्षों ने आपसी मतभेद भुलाकर एक सौहार्दपूर्ण वातावरण में इस पुराने विवाद को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0’ ला रहा रंग
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) जौनपुर के सचिव व सिविल जज (सी.डि.) सुशील कुमार सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिले में 1 अगस्त 2026 से 30 दिसंबर 2026 तक ‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0’ चलाया जा रहा है।
इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि द्वारा न्यायिक अधिकारियों को लगातार दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि अदालत में लंबित पुराने वादों का निपटारा मध्यस्थता (सुलह-समझौते) के माध्यम से कराया जा सके।
1987 का था मामला, स्थायी निषेधाज्ञा का था विवाद
जनपद न्यायाधीश के निर्देशों के अनुपालन में, न्यायालय अपर सिविल जज (जूनियर डिविजन) पंचम, जौनपुर की पीठासीन अधिकारी सुश्री मेधा कुशवाहा के समक्ष एक बेहद पुराना मामला विचाराधीन था।
यह मूलवाद संख्या (O-S- 126/1987) ‘प्रभुदेई बनाम शहदेव’ के नाम से दर्ज था, जो स्थायी निषेधाज्ञा से संबंधित था।
न्यायालय ने इस 40 साल पुराने विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की संभावना को देखते हुए पत्रावली को ‘सुलह-समझौता केन्द्र’ जौनपुर भेज दिया था।
मध्यस्थ और अधिवक्ताओं के प्रयास से निकली राह
मध्यस्थता केंद्र में मध्यस्थ मनोज कुमार वर्मा ने दोनों पक्षकारों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया और विवाद की मूल जड़ तक पहुंचने का प्रयास किया।
उनके अथक प्रयासों के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकालने के लिए राजी हो गए।
इस पूरी प्रक्रिया में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं— कमलेश कुमार अग्रहरि और गोपी शंकर श्रीवास्तव ने भी सकारात्मक सहयोग प्रदान किया।
अधिकारियों ने कहा कि इस निस्तारण ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बातचीत के जरिये अदालत के बाहर बड़े से बड़े और पुराने से पुराने वादों का निपटारा सौहार्दपूर्ण तरीके से किया जा सकता है।
इससे न केवल समय और धन की बचत होती है, बल्कि पक्षकारों के आपसी संबंध भी प्रेमपूर्ण और मधुर बने रहते हैं।
जौनपुर न्यायालय: 4 दशक पुराने मामले का सफल निस्तारण
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विवरण (Key Details) |
जानकारी (Information) |
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अभियान का नाम |
राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0 (1 अगस्त – 30 दिसंबर 2026) |
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मूलवाद संख्या व वर्ष |
O-S- 126/1987 (लगभग 40 साल पुराना मामला) |
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पक्षकारों के नाम |
प्रभुदेई बनाम शहदेव |
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विवाद का प्रकार |
स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) |
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संबंधित न्यायालय |
अपर सिविल जज (जू.डि.) पंचम (पीठासीन अधिकारी: सुश्री मेधा कुशवाहा) |
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मध्यस्थ (Mediator) |
मनोज कुमार वर्मा (सुलह-समझौता केन्द्र, जौनपुर) |
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सहयोगी अधिवक्ता |
कमलेश कुमार अग्रहरि और गोपी शंकर श्रीवास्तव |











