विशेष रिपोर्ट: संसद से ‘SHANTI’ बिल पारित, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश के द्वार खुले

“भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक युगांतरकारी बदलाव की नींव रखते हुए संसद के दोनों सदनों ने ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (SHANTI) विधेयक 2025 को मंजूरी दे दी है”

नई दिल्ली 19 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के तकनीकी परिदृश्य के लिए एक ‘परिवर्तनकारी क्षण’ करार दिया है, जबकि विपक्ष और श्रमिक संगठनों ने इसे निजी हितों को साधने वाला कदम बताया है।

क्या है SHANTI बिल और क्यों है यह खास?

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अब तक चली आ रही सरकारी एकाधिकार की व्यवस्था को समाप्त करना है। बिल के प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:

  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: परमाणु संयंत्रों की स्थापना और संचालन में निजी कंपनियों को अनुमति देना।

  • स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य: 2047 तक 100 गीगावाट स्वच्छ परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करना।

  • तकनीकी नवाचार: AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ग्रीन मैन्यूफैक्चरिंग को परमाणु ऊर्जा के माध्यम से सशक्त बनाना।

सरकार का पक्ष: ‘विकसित भारत’ के लिए अनिवार्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल के पारित होने पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह कानून युवाओं के लिए अवसर पैदा करेगा और निवेश को आकर्षित करेगा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में स्पष्ट किया कि:

“2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ऊर्जा सुरक्षा पहली शर्त है। बढ़ती भौगोलिक भूमिका और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढलने के लिए परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी आवश्यक है।”

विपक्ष और संगठनों का कड़ा विरोध: सुरक्षा और जवाबदेही पर सवाल

जहाँ सरकार इसे भविष्य की जरूरत बता रही है, वहीं विपक्ष और कई संगठन इसके दूरगामी परिणामों को लेकर आशंकित हैं।

1. सुरक्षा के साथ समझौता: ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) का कहना है कि परमाणु ऊर्जा कोई सामान्य व्यवसाय नहीं है। निजी कंपनियों के प्रवेश से परमाणु सुरक्षा और जवाबदेही (Nuclear Safety and Accountability) का ढांचा चरमरा सकता है। किसी दुर्घटना की स्थिति में निजी क्षेत्र की जिम्मेदारी तय करना कठिन होगा।

2. निजीकरण का आरोप: विपक्ष का तर्क है कि यह विधेयक सार्वजनिक संपत्ति को निजी और विदेशी कंपनियों को सौंपने की साजिश है। आरोप लगाया जा रहा है कि यह बिल केवल चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है।

3. विदेशी हस्तक्षेप की आशंका: आलोचकों का मानना है कि नागरिक परमाणु क्षेत्र में विदेशी भागीदारी से देश की रणनीतिक स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।

23 दिसंबर को देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

इस बिल के विरोध में देश के बड़े श्रमिक और किसान संगठनों ने हाथ मिला लिया है।

  • AIPEF के नेतृत्व में आगामी 23 दिसंबर को देशभर में प्रदर्शन किया जाएगा।

  • इस आंदोलन में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और प्रमुख केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने भी अपना समर्थन देने का एलान किया है।

विरोध का आधार मुख्य चिंता
कॉर्पोरेट लाभ आरोप है कि बिल का झुकाव केवल निजी लाभ की ओर है।
सुरक्षा जोखिम परमाणु क्षेत्र में निजी नियंत्रण से सुरक्षा मानकों में ढिलाई का डर।
विदेशी भागीदारी विदेशी कंपनियों के हस्तक्षेप से राष्ट्रीय सुरक्षा पर संभावित असर।
जवाबदेही दुर्घटना या चूक की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने में जटिलता।

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