सोलन – “खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल – 2024” द्वितीय दिवस

“शनिवार को दूसरे दिन, खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल 2024 में कई प्रमुख सत्र आयोजित किए गए। इस दौरान चर्चाओं का केंद्र बिंदु प्रतिरोध और नवीनीकरण थीम पर रहा”

कसौली  20 / 10 / 2024 नीतू कौशल की रिपोर्ट 

विभिन्न विशेषज्ञों और लेखकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए साहित्य और समाज पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। इस वर्ष लिफ्टफेस्ट कसौली में खुशवंत सिंह को याद करते हुए कई भावुक क्षण आए।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनकी रचनाओं और विचारों को साझा करते हुए उनकी याद में श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी साहित्यिक यात्रा और जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए, कई लेखकों ने कहा कि खुशवंत सिंह का लेखन आज भी लोगों को प्रेरित करता है।

इस मौके पर उनकी याद में कुछ लोगों की आंखें नम भी हो गईं, शनिवार को आयोजित सत्र के दौरान डा. मीरण चड्ढा बोरवणकर ने बताया कि उनकी किताब मैडम कमिश्नर में उनके कार्यकाल की यादें और महाराष्ट्र की राजनीति एवं अपराध जगत की एक अनूठी झलक प्रस्तुत की गई है।

उन्होंने कसाब और याकूब मेमन की फांसी की प्रक्रिया में अपनी भूमिका का विस्तार से वर्णन किया, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ उनके ठोस कदमों का उल्लेख है।

इसके अलावा, संजय दत्त के केस में उनकी जांच प्रक्रिया, छोटा राजन और दाउद इब्राहिम जैसे कुख्यात अपराधियों के साथ उनके अनुभवों, और एक महिला आईपीएस अधिकारी के रूप में झेली गई चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है।

इसके इलावा किताब में डोभाल के साथ उनकी बातचीत और उसके बाद की घटनाओं में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को शामिल किया गया है।

इसके इलावा नुसरत जाफऱी अपने अनुभवों को सांझा करते हुए लिखी किताब दिस लैंड वी कॉल होम पर विस्तृत चर्चा की ।कसौली लिटफेस्ट में सत्र के दौरान एमके रंजीत सिंह झा ने बताया कि उनकी पुस्तक माउंटेन मेमल्स इन द वल्र्ड में पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले विभिन्न स्तनधारियों के जीवन और उनके पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में जानकारी प्रस्तुत की गई है।

इस दौरान राधा कुमार ने कहा कि इंडिया बोर्न इन कनफ्लिक्ट यह दर्शाता है कि भारत का उदय संघर्षों और विभिन्न हितों के टकराव से हुआ है। यह विविधता और जटिलता भारतीय समाज को आकार देती है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसे और अधिक मजबूत बनाती है।

राधा कुमार की किताब रेनविंग इंडियन डेमोक्रेेसी भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियों और संभावनाओं का गहन विश्लेषण करती है। यह पुस्तक राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करती है।

कुमार ने इस पुस्तक में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती, नागरिक भागीदारी, और चुनावी सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है। खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में श्रोताओं को भी सवाल पूछने का अवसर मिला, जिससे बातचीत में और भी गहराई आई।

इसके अलावा, कई पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। उपस्थित दर्शकों ने इस अवसर का भरपूर आनंद लिया और साहित्यिक चर्चा में सक्रिय भागीदारी की।