SIR विवाद: 23 विपक्षी दलों ने CJI को लिखा पत्र, EC पर सवाल
‘लोकतंत्र खतरे में’: SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप, 23 विपक्षी दलों ने CJI को पत्र लिखकर की दखल की मांग”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
देश में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घमासान छिड़ गया है।
SIR प्रक्रिया को लेकर 23 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय सांसद ने केंद्र की मोदी सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
विपक्ष ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को एक विस्तृत पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया में कथित खामियों और चुनाव से जुड़े अन्य गंभीर मुद्दों पर चिंता जताते हुए न्यायपालिका से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
इन बड़े नेताओं के हैं हस्ताक्षर
28 जून को सीजेआई को भेजे गए इस अहम पत्र पर इंडिया गठबंधन के कई दिग्गज नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष)
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राहुल गांधी (लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष)
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अखिलेश यादव (सपा अध्यक्ष)
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ममता बनर्जी (TMC चीफ)
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तिरुचि शिवा (DMK नेता)
केसी वेणुगोपाल का मोदी-शाह पर सीधा हमला
इस पत्र को शुक्रवार को सार्वजनिक करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा, “देश के चुनावी लोकतंत्र को मोदी-शाह से सबसे बड़ा खतरा है।
“ वेणुगोपाल ने न्यायपालिका की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, “लोकतंत्र की रक्षा करना न्यायपालिका की संवैधानिक जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट पर यह सुनिश्चित करने की बड़ी जिम्मेदारी है कि चुनावों का स्वरूप न केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष हो, बल्कि वह निष्पक्ष दिखे भी। इसके बिना 1.4 अरब मतदाताओं के साथ हर दिन अन्याय होता रहेगा।”
CJI को लिखे पत्र की 4 प्रमुख बातें
1. चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल विपक्ष ने आरोप लगाया है कि हाल के वर्षों में चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था की तरह काम नहीं कर रहा है।
आयोग के कई फैसले सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दल के पक्ष में दिखाई देते हैं, जिससे उसकी निष्पक्षता और नियुक्ति प्रक्रिया दोनों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
2. बिहार में SIR प्रक्रिया का कड़ा विरोध पत्र में सबसे प्रमुख मुद्दा बिहार में लागू की जा रही SIR प्रक्रिया का है।
विपक्षी दलों का तर्क है कि इस प्रक्रिया को बिना किसी पर्याप्त आधार के और जल्दबाजी में शुरू किया गया है।
विपक्ष ने आशंका जताई है कि इसके आड़ में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम मनमाने ढंग से हटाए जा सकते हैं।
3. पश्चिम बंगाल चुनाव का जिक्र विपक्ष ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह वहां सैकड़ों अधिकारियों के अचानक तबादले किए गए और मतदाता सूची से नाम हटाए गए। विपक्ष का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी।
4. सुप्रीम कोर्ट से क्या है विपक्ष की मांग? पत्र के अंत में 23 दलों ने सुप्रीम कोर्ट से निम्नलिखित मांगे की हैं:
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चुनाव आयोग की हालिया कार्यप्रणाली की गहन न्यायिक समीक्षा की जाए।
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SIR प्रक्रिया की वैधता और निष्पक्षता की तुरंत जांच हो।
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लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।
विपक्ष ने उम्मीद जताई है कि पारदर्शिता के हित में उठाए गए इस कदम के बाद सुप्रीम कोर्ट चुनाव प्रक्रिया की ईमानदारी और करोड़ों लोगों के भरोसे को बहाल करने के लिए जरूरी कार्रवाई करेगा।











