केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा पहले मेड-इन-इंडिया एक्जिम शिपिंग कंटेनर का अनावरण करते हुए प्रतीकात्मक चित्र।

आत्मनिर्भर भारत की उड़ान: लॉन्च हुआ पहला मेड-इन-इंडिया शिपिंग कंटेनर

समुद्री विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग: लॉन्च हुआ पहला ‘मेड-इन-इंडिया’ शिपिंग कंटेनर; ग्लोबल कंपनी Maersk ने दिया 1000 का नया ऑर्डर”

दादरी (उत्तर प्रदेश)/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत के समुद्री और विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्रों ने आज एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है।

‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन को धरातल पर उतारते हुए केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उत्तर प्रदेश के दादरी स्थित अंतर्देशीय कंटेनर डिपो में पहले ‘मेड-इन-इंडिया’ निर्यात-आयात (EXIM) शिपिंग कंटेनर को आधिकारिक तौर पर जारी किया।

यह पहला स्वदेशी कंटेनर दुनिया की प्रमुख वैश्विक समुद्री माल वाहक कंपनी एपी मोलर-मर्स्क (AP Moller-Maersk) को सौंपा गया है।

मर्स्क का भारत पर भरोसा: 1000 नए कंटेनरों का ऑर्डर

भारत के तेजी से उभरते कंटेनर निर्माण इकोसिस्टम में गहरा भरोसा जताते हुए, ग्लोबल शिपिंग दिग्गज ‘मर्स्क’ ने इसी कार्यक्रम के दौरान डीसीएम श्रीराम ग्रुप (DCM Shriram Group) को भारत में निर्मित 1,000 अतिरिक्त शिपिंग कंटेनरों का बड़ा ऑर्डर भी दे दिया है।

  • 16 महीने में विजन हुआ साकार: यह ऐतिहासिक उपलब्धि फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मर्स्क के अध्यक्ष रॉबर्ट मर्स्क उगला के बीच हुई अहम बैठक का परिणाम है।

  • पीएम मोदी के प्रोत्साहन के मात्र 16 महीनों के भीतर ही इसे सफलतापूर्वक क्रियान्वित कर दिया गया।

  • वैश्विक मानक: भारत में निर्मित यह पहला कंटेनर पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों (ISO विनिर्देशों) के अनुरूप तैयार किया गया है, जो इसे दुनिया भर में उपयोग के लिए एकदम उपयुक्त बनाता है।

क्या है 10 हजार करोड़ की ‘CMPS’ नीति?

इस मौके पर श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा,

“हम केवल शिपिंग कंटेनर ही नहीं बना रहे हैं, बल्कि विकसित भारत के लिए विश्व स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी समुद्री विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहे हैं।”

सरकार की इस सफलता के पीछे केंद्रीय बजट 2026 में घोषित कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (CMPS) का बड़ा हाथ है:

  • 10,000 करोड़ का बजट: इस योजना के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

  • क्षमता में 10 गुना वृद्धि: इस नीति का मुख्य लक्ष्य भारत की वार्षिक कंटेनर विनिर्माण क्षमता को 10 गुना बढ़ाकर 7.9 लाख टीईयू (TEU) तक पहुंचाना है।

  • फंडिंग और मदद: इसके जरिए ग्रीनफील्ड संयंत्रों की स्थापना, ब्राउनफील्ड संयंत्रों के विस्तार, परिचालन लागत को कम करने और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए सीधे वित्तीय सहायता दी जा रही है।

ग्लोबल मैरीटाइम हब बनने की राह पर भारत

सरकार के इन प्रयासों से भारत की विदेशी कंटेनरों पर निर्भरता खत्म होगी। व्यापार सुगमता को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में कई बड़े कदम उठाए हैं:

  • व्यावसायिक जहाजरानी अधिनियम 2025 और भारतीय पत्तन अधिनियम 2025 जैसे नए कानून लागू किए गए हैं।

  • 70 हजार करोड़ रुपये की जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना शुरू की गई है।

  • कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (CPPI) 2025 की वैश्विक ‘टॉप 30’ लिस्ट में अब तीन भारतीय बंदरगाह शामिल हो चुके हैं।

  • वधावन बंदरगाह और गलाथिया खाड़ी जैसे मेगा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है।

कार्यक्रम में नीदरलैंड की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स, मर्स्क के प्रबंध निदेशक थॉमस थीउवेस और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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