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रोबोट्स ने सैन्य ठिकाने पर किया कब्जा, सैनिकों ने मशीनों के आगे किया सरेंडर

भविष्य का युद्ध बना हकीकत: यूक्रेन के रोबोट्स और ड्रोन्स ने रूसी सैन्य ठिकाने पर किया कब्जा, इंसानी सैनिकों ने रोबोट के आगे टेके घुटने

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रूस-यूक्रेन युद्ध अब एक ऐसे अविश्वसनीय और ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां हॉलीवुड की साइंस-फिक्शन (Sci-Fi) फिल्में हकीकत में बदलती हुई नजर आ रही हैं।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने खुलासा किया है कि यूक्रेनी सेना के ‘ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम्स’ (Ground Robotic Systems) और ड्रोन्स ने मिलकर बिना किसी मानव सैनिक की मदद के एक रूसी सैन्य ठिकाने पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया है।

रोबोटों के सामने दुश्मन का ऐतिहासिक आत्मसमर्पण

युद्ध के इतिहास में यह अपनी तरह की पहली और अनोखी घटना मानी जा रही है। इस पूरी सैन्य कार्रवाई में यूक्रेन का एक भी इंसानी सैनिक मोर्चे पर मौजूद नहीं था।

ड्रोन और जमीन पर चलने वाले हथियारबंद रोबोट्स ने ऐसा अचूक और घातक जाल बुना कि रूसी सैनिकों को मजबूर होकर मशीनों (रोबोटों) के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) करना पड़ा।

सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति जेलेंस्की ने उस स्थान का खुलासा नहीं किया है, जहां इस हाई-टेक ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।

बिना मानवीय नुकसान के मिली शत-प्रतिशत सफलता

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस ऐतिहासिक जीत की जानकारी साझा की।

उन्होंने लिखा कि इस ऑपरेशन को पूरी तरह से मानव रहित (Unmanned) प्लेटफॉर्म द्वारा अंजाम दिया गया।

इस मिशन में किसी भी यूक्रेनी सैनिक की जान जोखिम में नहीं डाली गई और शून्य मानवीय नुकसान के साथ दुश्मन की चौकी पर कब्जा कर लिया गया।

3 महीने में 22,000 से ज्यादा सफल मिशन: हजारों सैनिकों की बची जान

जेलेंस्की के अनुसार, यूक्रेनी सेना में मशीनों का उपयोग युद्ध के परिणाम को बदल रहा है। यूक्रेन के स्वदेशी रोबोटिक सिस्टम्स जैसे- ‘रेटेल’ (Ratel), ‘टर्मिट’ (Termit), ‘अर्दल’ (Ardal) और ‘जमी’ (Zami) ने पिछले तीन महीनों में 22,000 से ज्यादा सैन्य मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जिन खतरनाक इलाकों में पहले सैनिकों को अपनी जान हथेली पर रखकर जाना पड़ता था, अब वहां इन घातक रोबोट्स को भेजा जा रहा है। इस रणनीति से हजारों यूक्रेनी सैनिकों की जान बचाने में कामयाबी मिली है।

आने वाले समय में 30% पैदल सेना की जगह लेंगे रोबोट

यदि जेलेंस्की का यह दावा पूरी तरह सही है, तो यह भविष्य की जंग (Future Warfare) की एक जीवंत मिसाल है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की के सलाहकार अलेक्जेंडर कामिशिन के मुताबिक, आने वाले समय में ‘अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल’ (UGV) युद्ध की पूरी तस्वीर बदल कर रख देंगे।

उन्होंने दावा किया कि मौजूदा तकनीकी क्षमता के आधार पर यूक्रेन की 30 प्रतिशत पैदल सेना (Infantry) को तत्काल प्रभाव से इन युद्धक रोबोट्स से बदला जा सकता है, जो आधुनिक युद्ध नीति में एक बहुत बड़ी क्रांति है।

Santosh SETH

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