गणतंत्र दिवस: PM मोदी ने संस्कृत श्लोक के जरिए दिया राष्ट्र को संदेश, कहा- ‘पराधीन देश की प्रगति संभव नहीं, एकता ही स्वतंत्रता का साधन’
“देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित किया है”
नई दिल्ली | The Politics Again संतोष सेठ की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विशेष संस्कृत सुभाषितम (श्लोक) साझा करते हुए राष्ट्र को एक सशक्त संदेश दिया।
गणतंत्र दिवस हमारी स्वतंत्रता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का सशक्त प्रतीक है। यह पर्व हमें एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है।
पारतन्त्र्याभिभूतस्य देशस्याभ्युदयः कुतः।
अतः स्वातन्त्र्यमाप्तव्यमैक्यं स्वातन्त्र्यसाधनम्॥ pic.twitter.com/i0XjjgL38x
— Narendra Modi (@narendramodi) January 26, 2026
गणतंत्र दिवस
नई ऊर्जा और प्रेरणा का पर्व प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि यह भारत की स्वतंत्रता, हमारे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक शक्तिशाली प्रतीक है।
उन्होंने कहा, “यह पर्व हमें एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है।”
पीएम मोदी द्वारा साझा किया गया संस्कृत श्लोक प्रधानमंत्री ने देश की प्रगति के लिए ‘स्वतंत्रता और एकता’ को अनिवार्य बताते हुए लिखा:
“पारतन्त्र्याभिभूतस्य देशस्याभ्युदयः कुतः। अतः स्वातन्त्र्यमाप्तव्यमैक्यं स्वातन्त्र्यसाधनम्॥”
श्लोक का अर्थ और संदेश इस सुभाषितम का अर्थ समझाते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि जो राष्ट्र दूसरों पर निर्भर है या अधिकारों से वंचित है (पराधीन), उसका उदय या प्रगति संभव नहीं है।
इसलिए, राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्रता प्राप्त करना आवश्यक है, और उस स्वतंत्रता को पाने और बनाए रखने का एकमात्र साधन ‘एकता’ (Unity) है।
पीएम मोदी का यह संदेश ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते देश के लिए एकजुटता को मूल मंत्र के रूप में स्थापित करता है।











