RBI लिक्विडिटी 48014 करोड़

RBI ने बैंकिंग सिस्टम में डाले ₹48,014 करोड़, किया नकदी का प्रबंध

RBI का बड़ा एक्शन: नकदी का संतुलन बनाने के लिए बैंकिंग सिस्टम में डाले 48,014 करोड़ रुपये, एडवांस टैक्स से बिगड़ा था फ्लो

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम में नकदी के प्रवाह (Liquidity) को संतुलित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।

मंगलवार को केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग प्रणाली में 48,014 करोड़ रुपये की शॉर्ट टर्म लिक्विडिटी (अल्पकालिक तरलता) डाली है।

यह फंड 7-दिवसीय ‘वेरिएबल रेट रेपो’ (VRR) नीलामी के जरिए 5.26 प्रतिशत की कट-ऑफ दर पर सिस्टम में डाला गया है।

क्यों पड़ी इस फंड की जरूरत?

हाल ही में कॉरपोरेट जगत द्वारा ‘एडवांस टैक्स’ (अग्रिम कर) के भारी भुगतान के कारण बैंकों से बड़े पैमाने पर पैसा बाहर गया था। इसके चलते बैंकिंग प्रणाली में नकदी के अधिशेष में तेज गिरावट दर्ज की गई।

15 मार्च तक सिस्टम में लगभग 2.08 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी थी, जो टैक्स आउटफ्लो के बाद 16 मार्च को तेजी से गिरकर मात्र 75,483.63 करोड़ रुपये रह गई थी। इसी कमी को पूरा करने के लिए आरबीआई ने यह कदम उठाया।

बैंकों ने कम दिखाई दिलचस्पी

इस नीलामी की सबसे खास बात यह रही कि लिक्विडिटी में भारी गिरावट के बावजूद बैंकों ने कम फंड की मांग की।

आरबीआई ने इस VRR नीलामी के लिए 1.50 लाख करोड़ रुपये की राशि तय की थी, लेकिन इसके मुकाबले सिस्टम में केवल 48,014 करोड़ रुपये ही डाले गए।

क्या है वीआरआर (VRR) नीलामी?

वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी के तहत, आरबीआई छोटी अवधि के लिए परिवर्तनशील ब्याज दरों पर फंड की नीलामी करता है।

इसमें वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक नकदी की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक निश्चित राशि की बोली लगाते हैं।

आगे GST से और बढ़ सकता है दबाव

बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी की स्थिति और अधिक ‘टाइट’ (तंग) हो सकती है।

इस सप्ताह के अंत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) का भुगतान होना है, जिससे बैंकों से और अधिक फंड बाहर जाएगा।

आरबीआई पिछले कुछ महीनों से लगातार ओवरनाइट दरों को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रहा है।

इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने जनवरी 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों की ओपन मार्केट खरीद (OMO) के जरिए भी बैंकिंग प्रणाली में कुल 3.50 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी डाली है।

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