पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का हाई-वोल्टेज ड्रामा, बही खून की धार
पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का हाई-वोल्टेज ड्रामा: लहूलुहान नाक, फटा कुर्ता… क्या इस एक ‘तस्वीर’ ने बदल दिया कांग्रेस का नैरेटिव?
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
राजनीति में सही वक्त पर सही ‘ऑप्टिक्स’ (Optics) यानी तस्वीरों का दांव बड़े-बड़े समीकरण बदल देता है।
मंगलवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के बाहर जो नाटकीय तस्वीरें सामने आईं, उसने कांग्रेस के लिए ठीक यही काम किया है।
पुलिस की ज़ोर-जबरदस्ती के बीच लहूलुहान नाक, धूल में सने कपड़े, सफेद टी-शर्ट पर खून के धब्बे और एक पैर से लापता जूते के साथ जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को हिरासत में लिया गया, तो यह खबर सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन की नहीं रही।
इस एक आक्रामक तस्वीर ने नीट (NEET) पेपर लीक मामले में कांग्रेस को सीधे फ्रंटफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है।
1999 के बाद पहली बार PM आवास पर ऐसा प्रदर्शन
राहुल और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई सीनियर नेता अचानक 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर पहुंच गए और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने लगे।
वे प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई का विरोध कर रहे थे, तभी सुरक्षाबलों ने उन्हें घसीटकर हिरासत में ले लिया।
शायद विपक्ष के किसी बड़े नेता ने पहले कभी प्रधानमंत्री के घर के बाहर इस तरह का सीधा विरोध प्रदर्शन नहीं किया था।
इससे पहले ऐसा प्रदर्शन 1999 में IC-814 विमान अपहरण के वक्त हुआ था, जब बंधकों के परिवारों ने तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के आवास के बाहर धरना दिया था।
हालांकि, हाई-सिक्योरिटी वाले इलाके में राहुल के इस प्रदर्शन को सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस की सख्त कार्रवाई को सही ठहराया।
सड़क पर लेटे राहुल और खून से सनी टी-शर्ट
मंगलवार के इस घटनाक्रम ने एक ऐसा नैरेटिव सेट किया है, जिसकी कांग्रेस को लंबे समय से तलाश थी।
एक फ्रेम में राहुल गांधी सड़क पर लेटे हुए दिखे, जबकि पुलिसकर्मी उन्हें उठाने की कोशिश कर रहे थे।
अगले ही पल, उनकी नाक से खून बह रहा था और पुलिस उन्हें जबरन उठाने के लिए उनके हाथ-पैर पकड़कर बस की ओर ले जा रही थी। इस दौरान उनकी सफेद टी-शर्ट पर खून के धब्बे साफ देखे जा सकते थे।
पुलिस बस में बिठाए जाते वक्त राहुल ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा,
“भारत में लोकतंत्र का यही हाल है।” इस घटना पर व्यंग्यकार और पत्रकार कमलेश किशोर सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि “राजनीति में यह तस्वीर एक तरह से ‘दीक्षा’ या नई शुरुआत जैसी है, राहुल गांधी के करियर में इसी की कमी थी।”
CJP से छीनी लाइमलाइट, एक तीर से कई निशाने
दरअसल, पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने जोरदार प्रदर्शन शुरू किया था, जिससे युवाओं का गुस्सा सरकार के खिलाफ भड़क रहा था।
कांग्रेस इस आंदोलन को सीधा समर्थन देने से हिचकिचा रही थी क्योंकि अटकलें थीं कि CJP को ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) का बैकअप हासिल है।
राहुल के लंबे विदेश दौरे के कारण कांग्रेस का अपना ‘छात्रों की गूंज’ कैंपेन भी ठंडा पड़ गया था।लेकिन, पीएम के दरवाजे तक अपना प्रदर्शन ले जाकर राहुल ने एक तीर से कई निशाने साधे।
इस घटनाक्रम ने राहुल गांधी को रातों-रात फिर से इस पूरे छात्र आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया।
शिक्षा मंत्री नहीं, सीधे PM को ठहराया जिम्मेदार
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का सबसे बड़ा रणनीतिक पहलू यह रहा कि कांग्रेस ने नैरेटिव को पूरी तरह से बदल दिया।
अब तक विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहा था, लेकिन राहुल ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा कर दिया।
राहुल ने कहा, “सरकार की पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में बहस करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। हम युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के बारे में प्रधानमंत्री से जवाब मांगने के लिए उनके घर तक मार्च करके आए हैं।”
क्या राहुल गांधी ने पीएम आवास के बाहर जाकर कोई लक्ष्मण रेखा पार की? इस पर बहस जारी रहेगी, लेकिन यह तय है कि खून से लथपथ विपक्ष के नेता की यह तस्वीर भारतीय राजनीति में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।











