लोकसभा चुनाव का परिणाम 4 जून को आया। इसके साथ ही देश की राजनीति के केंद्र में आ गया किसी राज्य को विशेष दर्जा देने का मामला। इसकी वजह हैं बिहार के सीएम नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू। इस बार मोदी सरकार को चलने के लिए नायडू की TDP और नीतीश के JDU के सहारे की जरूरत है। ये दोनों ही नेता अपने-अपने राज्य को स्पेशल स्टेटस दिलाने की मांग उठाते रहे हैं। ऐसे में जब दोनों नेता केंद्र सरकार में मजबूत भागीदार बने, तो उन पर इस मुद्दे को उसी अनुरूप उठाने का दबाव बढ़ा। अब यह दबाव कहां तक बनाया जाता है और BJP इससे किस तरह निबटेगी, आने वाले समय में केंद्र सरकार की स्थिरता बहुत हद तक इस बात पर भी निर्भर रहेगी। JDU ने तो संसद के मौजूदा सत्र में ही इस मामले को उठाने की मांग कर दी है। ऐसे में केंद्र सरकार और BJP के लिए पहली बड़ी परीक्षा मंगलवार को होगी, जब तीसरे टर्म का पहला पूर्णकालिक बजट पेश किया जाएगा। दोनों नेता इस बजट में अपने लिए खास की उम्मीद कर रहे हैं ताकि वे अपने-अपने राज्यों में जनता के बीच दिल्ली में अपनी भागीदारी को जस्टिफाई कर सकें। वहीं, BJP की दुविधा इन दो राज्यों के इतर मांग और जरूरतों के बीच संतुलन बनाना है।
आसान नहीं इस मांग से हटना
चंद्रबाबू नायडू हों या नीतीश कुमार, अपने राज्य के लिए स्पेशल पैकेज की मांग से पीछे हटने का सियासी विकल्प इन दोनों में से किसी के पास नहीं है। यही कारण है कि बजट से पहले नायडू ने दो बार दिल्ली की यात्रा की। मकसद बस मांग को लेकर दबाव बनाने का था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित सभी संबंधित लोगों से मुलाकात की। साथ ही, आंध्र के लिए स्पेशल पैकेज की मांग सार्वजनिक मंच से रखी। ऐसी भी खबरें आईं कि केंद्र सरकार चंद्रबाबू की मांग के अनुरूप आंध्र प्रदेश में कई निवेश और प्रॉजेक्ट शुरू करने को तैयार है। हालांकि चंद्रबाबू अपनी सारी मांगों को पूरा करने के अलावा कुछ भी कम स्वीकारने को राजी नहीं। दरअसल, 2018 में आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर ही TDP ने मोदी सरकार का साथ छोड़ा था। बाद में पार्टी ने इसे BJP के खिलाफ बड़ा मुद्दा भी बनाया था। अब उन पर उनके ही प्रदेश में अपने इस स्टैंड पर टिके रहने का स्वाभाविक दबाव है।
इसी तरह, बिहार में JDU नेता और राज्य के सीएम नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर कभी समझौता नहीं करने की बात कही है। 2013 में नीतीश के NDA से अलग होने के पीछे यही मुद्दा तात्कालिक कारण बना था। तब से लेकर अब तक तमाम सार्वजनिक मंचों से JDU अपनी इस मांग को लेकर मुखर रहा है। रविवार को संसद सत्र से पहले सर्वदलीय मीटिंग में JDU ने यह मांग रखी। इससे पहले पार्टी कार्यकारिणी की मीटिंग में भी यह मामला उठा। पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने मांग रखी कि बिहार को विशेष दर्जा और उसके तहत पैकेज मिले, ताकि विकास के रास्ते पर राज्य उभर कर सामने आ सके। बिहार के भीतर RJD इस मांग को लेकर JDU पर लगातार दबाव बनाए हुए है।
असीमित मांग, सीमित विकल्प
केंद्र सरकार और BJP के सामने दोहरी चुनौती है। इन दो राज्यों की मांग को पूरा करना केंद्र के लिए आसान नहीं है। लेकिन, इनकी मांगों को पूरी तरह अनदेखा करने का जोखिम भी सरकार और पार्टी नहीं ले सकती। ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बजट पेश करते हुए अब तक का सबसे बड़ा संतुलन दिखाना होगा। बजट में आम लोगों को क्या मिलता है, इस बारे में जानने की जितनी बेसब्री है, उतनी ही यह जानने की भी है कि आंध्र और बिहार के हिस्से में क्या आता है।
आजमगढ़ तिहरे हत्याकांड का खौफनाक अंत: 8 घंटे चले पुलिस एनकाउंटर में आरोपी पिता ढेर,…
आयुर्वेद का स्वर्णिम युग: 11वें आयुर्वेद दिवस पर भारत की 5000 पुरानी चिकित्सा का आधुनिक…
नागपुर में आज मनेगा 11वां आयुर्वेद दिवस: 'स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद' थीम पर होगा…
बैंक हड़ताल पर सरकार की अपील: पीएलआई योजना ली वापस, '5 डे वर्किंग' की मांग…
आजमगढ़ में खूनी खेल: पूजा-पाठ के विवाद में पति ने पत्नी और 2 पंडितों को…
उल्टी बहने लगी गंगा: चीन को इलेक्ट्रॉनिक्स बेच रहा भारत, अमेरिका के स्मार्टफोन बाजार में…