जौनपुर में NEET पेपर लीक पर प्रदर्शन, NTA खत्म करने की मांग
जौनपुर में NEET पेपर लीक पर फूटा छात्रों का गुस्सा: AIDSO-AIDYO का संयुक्त प्रदर्शन, NTA को खत्म करने की उठी मांग
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही धांधली और विशेषकर NEET (नीट) पेपर लीक मामले ने पूरे देश के छात्रों और युवाओं को आक्रोशित कर दिया है।
इसी कड़ी में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के जौनपुर में ‘ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन’ (AIDSO) और ‘ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गनाइजेशन’ (AIDYO) ने संयुक्त रूप से एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया।
छात्र संगठनों ने इस चरम भ्रष्टाचार को चिकित्सा शिक्षा के निजीकरण और ‘कोचिंग माफिया’ का परिणाम बताते हुए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग की है।
राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को सौंपा 6-सूत्रीय ज्ञापन
छात्रों का यह विरोध जुलूस बदलापुर सब्जी मंडी स्थित संगठन के कार्यालय से शुरू होकर इंदिरा चौक होते हुए बदलापुर तहसील परिसर पहुंचा।
यहां प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित एक 6-सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
प्रमुख मांगें:
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NEET पेपर लीक में शामिल सभी दोषियों को चिन्हित कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
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परीक्षाओं में विफल हो चुकी राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को तुरंत समाप्त किया जाए।
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सार्वजनिक शिक्षा की रक्षा की जाए और शिक्षा के बाजारीकरण पर पूर्ण रोक लगे।
‘सुरक्षित तंत्र’ में सेंधमारी, उच्च-स्तरीय नेटवर्क का हाथ!
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि राजस्थान में NEET-UG 2026 के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द करने और CBI जांच के आदेश ने देश में केंद्रीकृत उच्च-स्तरीय परीक्षाओं के गहरे संकट को उजागर कर दिया है।
वक्ताओं ने कड़ी आशंका जताते हुए कहा कि इतने व्यापक रूप से प्रचारित “सुरक्षित” परीक्षा तंत्र को भेदने की क्षमता आम लोगों में नहीं हो सकती।
यह संगठित धांधली किसी प्रभावशाली और उच्च-स्तरीय नेटवर्क की संलिप्तता की ओर सीधा इशारा करती है।
कोचिंग उद्योग को फायदा, छात्रों पर मानसिक दबाव
AIDSO और AIDYO के नेताओं ने स्पष्ट किया कि NTA की लगातार विफलताएं एक दोषपूर्ण और अत्यधिक केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली का परिणाम हैं।
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इस अव्यवस्था का सीधा फायदा सिर्फ और सिर्फ ‘कोचिंग उद्योग’ को मिल रहा है।
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इसके कारण छात्रों और उनके परिवारों पर भारी मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक दबाव पड़ रहा है।
संगठनों ने जोर देकर कहा कि केवल प्रेस विज्ञप्तियों और सरकार के अस्पष्ट आश्वासनों से अब छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बहाल नहीं होने वाला है; इसके लिए ठोस और जमीनी कार्रवाई की आवश्यकता है।











