राजनीति : NDA की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन सकती है NCPI
🚨 बंगाल की सियासत में ‘महा-भूचाल’: ममता बनर्जी के 20 बागी सांसद NCPI में शामिल, जानें क्या है इस गुमनाम पार्टी का इतिहास?
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल की राजनीति में अचानक एक ऐसा तूफान आया है, जिसने देश भर की सियासत को हैरान कर दिया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है।
इन 20 बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने और अपने इस समूह का विलय NCPI (नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया) के साथ करने का सनसनीखेज ऐलान किया है।
इस ऐलान के बाद से ही पूरे देश में ‘NCPI’ पार्टी अचानक सुर्खियों में आ गई है। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर यह गुमनाम पार्टी कौन सी है, जिसमें इतने बड़े पैमाने पर सांसदों का विलय हो रहा है?
‘The Politics Again’ की इस रिपोर्ट में आइए जानते हैं NCPI का पूरा इतिहास:
📖 क्या है NCPI पार्टी का इतिहास?
NCPI यानी ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर त्रिपुरा में स्थित एक पंजीकृत (Registered) लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त छोटी क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी है।
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वोटर बेस: इसका मुख्य राजनीतिक केंद्र और वोटर बेस ‘बंगाली समुदाय’ को माना जाता है।
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बंगाल कनेक्शन: इस पार्टी का रजिस्ट्रेशन पश्चिम बंगाल के हावड़ा (संकराइल) में भी दर्ज है।
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अस्तित्व: हैरानी की बात यह है कि इस पार्टी के पास अपना एक भी सांसद या विधायक नहीं था। लेकिन टीएमसी के 20 सांसदों के विलय के बाद यह पार्टी रातों-रात संसद में एक बड़ी और महत्वपूर्ण ताकत बन जाएगी।
🗳️ 2023 के त्रिपुरा चुनाव में क्या था हाल?
NCPI ने वर्ष 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भी अपने कुछ उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, उस चुनाव में इसका एक भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका था। इस गुमनाम पार्टी को राष्ट्रीय पहचान अब जाकर मिली है।
🖋️ क्या है NCPI का चुनाव चिह्न?
चुनाव आयोग (Election Commission) के नियमों के अनुसार, NCPI एक गैर-मान्यता प्राप्त दल है, इसलिए इसके पास कोई ‘परमानेंट’ चुनाव चिह्न नहीं है।
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हालांकि, 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग ने इस पार्टी को ‘सात स्ट्रोक वाला इंक पेन का निब’ (सात किरणों वाली पेन की निब) चुनाव चिह्न आवंटित किया था।
🤝 NDA की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बनेगी NCPI!
इस राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर राष्ट्रीय राजनीति (National Politics) पर पड़ने वाला है।
NCPI ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ मिलकर काम करने और सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है।
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टीडीपी को छोड़ेगी पीछे: समर्थन के ऐलान के बाद, NCPI एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन जाएगी। फिलहाल 16 सांसदों के साथ टीडीपी (TDP) दूसरी बड़ी सहयोगी है, लेकिन NCPI के पास 20 सांसद होंगे।
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TMC का अस्तित्व खतरे में: टीएमसी की वरिष्ठ बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार सहित 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अलग बैठने की मांग की है।
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बागी गुट का दावा है कि उनके पास पार्टी के कुल 28 सांसदों में से दो-तिहाई (2/3) से अधिक का बहुमत है, जिससे दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) से उनका बचाव होगा।
इन सांसदों के बागी होने के बाद अब ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अस्तित्व बड़े खतरे में आ गया है।
नोट: पश्चिम बंगाल के इस महा-सियासी भूचाल, दलबदल और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ी हर एक्सक्लूसिव और अंदरूनी खबर के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।











