: पीएम मोदी का संदेश: ‘जनसेवा ही सुशासन की कसौटी’
पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम, बोले- ‘जनसेवा ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी’
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार (10 जून 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक प्राचीन संस्कृत सुभाषितम साझा किया।
जनसेवा ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी है। विनम्रता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ निरंतर कार्य करने वाला व्यक्ति ही जनविश्वास अर्जित करता है।
सदानुरक्तप्रकृतिः प्रजापालनतत्परः।
विनीतात्मा हि नृपतिर्भूयसी श्रियमश्नुते॥ pic.twitter.com/mn0Ax0F8hs
— Narendra Modi (@narendramodi) June 10, 2026
‘The Politics Again’ की राष्ट्रीय डेस्क के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इस श्लोक के माध्यम से यह संदेश दिया है कि सार्वजनिक सेवा (Public Service) ही सुशासन (Good Governance) की सबसे बड़ी कसौटी है और इसी से जनता का सच्चा विश्वास अर्जित किया जा सकता है।
‘विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा से मिलता है जनविश्वास’
प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में एक आदर्श जन प्रतिनिधि और शासक के गुणों को स्पष्ट करते हुए लिखा:
“जनसेवा ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी है। विनम्रता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ निरंतर कार्य करने वाला व्यक्ति ही जनविश्वास अर्जित करता है।”
पीएम मोदी द्वारा साझा किया गया संस्कृत श्लोक:
सदानुरक्तप्रकृतिः प्रजापालनतत्परः। विनीतात्मा हि नृपतिर्भूयसी श्रियमश्नुते॥
क्या है इस श्लोक का अर्थ? (सुशासन के मूल मंत्र)
प्रधानमंत्री ने इस सुभाषितम का विस्तृत अर्थ भी देशवासियों के साथ साझा किया। इस श्लोक के अनुसार, एक सच्चा और आदर्श जन प्रतिनिधि वह है जो:
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पवित्र कर्तव्य: जनसेवा को अपना एक पवित्र और सर्वोपरि कर्तव्य मानता है।
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अथक परिश्रम: जनता के कल्याण के लिए बिना थके निरंतर परिश्रम करता है।
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सुरक्षा और समृद्धि: सुशासन (Good Governance) के माध्यम से समाज की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करता है।
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विनम्रता और आत्म-अनुशासन: विनम्रता, आत्म-अनुशासन और विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ समाज की प्रगति की दिशा में समर्पित रहता है।
श्लोक में स्पष्ट किया गया है कि जो जन प्रतिनिधि इन सभी गुणों को अपने आचरण में उतार लेता है, वास्तव में वही जनता का असीम विश्वास, सम्मान, मान्यता और समृद्धि अर्जित करता है।











