पीएम मोदी की सचिवों संग अहम बैठक, बोले- साइलो की मानसिकता छोड़ें
पीएम मोदी की सचिवों को दो टूक: ‘अलग-अलग खांचों की मानसिकता छोड़ें, डेटा को मानें राष्ट्रीय संपत्ति और AI का करें प्रभावी इस्तेमाल’
स्थान: नई दिल्ली : संतोष सेठ की रिपोर्ट : THE POLITICS AGAIN
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को अपने आधिकारिक आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) पर भारत सरकार के सचिवों के साथ तीसरी अहम उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
इस महत्वपूर्ण बैठक में अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर), संपर्क तंत्र, सुरक्षा, विदेश मामलों और सुशासन से जुड़े मंत्रालयों व विभागों की भावी कार्य-योजनाओं पर गहन मंथन हुआ।
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि वे केवल तात्कालिक मुद्दों और आंकड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि देश के भविष्य को आकार देने के लिए एक दीर्घकालिक (Long-term) दृष्टिकोण अपनाएं।
‘साइलो (Silo) में काम करना संगठनात्मक नहीं, मानसिकता की समस्या’
सरकारी विभागों में अलग-अलग खांचों (Silos) में काम करने की पुरानी कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह केवल एक ढांचागत समस्या नहीं, बल्कि मानसिकता से जुड़ी बीमारी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का पूरा स्वामित्व (Ownership) लेते हुए अपनत्व की भावना से काम करना चाहिए।
सामूहिक प्रयासों की ताकत का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी और हालिया पश्चिम एशिया संकट का जिक्र किया, जब विभिन्न विभागों ने मिलकर बेहतरीन काम किया था।
उन्होंने कहा कि समन्वय की यही व्यवस्था सरकार की कार्य संस्कृति का स्वाभाविक हिस्सा बननी चाहिए।
डेटा है राष्ट्रीय संपत्ति, AI के अभिनव इस्तेमाल की जरूरत
प्रौद्योगिकी और भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने কৃत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के प्रभावी उपयोग का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि AI की अपार क्षमताओं को मानवीय विशेषज्ञता और विवेक के साथ जोड़ने के नए तरीके खोजे जाने चाहिए।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि ‘डेटा एक राष्ट्रीय संपत्ति और भविष्य का अहम संसाधन है।’ उन्होंने चिंता जताई कि विभागीय खांचों और खंडित प्रणालियों के कारण डेटा की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता।
उन्होंने ऐसी तकनीकी प्रणालियां विकसित करने को कहा जो विभागों के बीच बेहतर सामंजस्य (Interoperability) सुनिश्चित कर सकें।
रक्षा क्षेत्र में नवाचार और युवाओं से जुड़ने की अपील
नीति-निर्माण में ताजगी लाने के लिए प्रधानमंत्री ने सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच अधिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ विचार सामने आ सकें।
सुरक्षा के मोर्चे पर बोलते हुए पीएम मोदी ने रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार (R&D) पर विशेष ध्यान केंद्रित करने को कहा।
उन्होंने भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, नए और नवोन्मेषी रक्षा पाठ्यक्रम विकसित करने तथा रक्षा क्षेत्र में मानव संसाधन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए।
‘पोर्ट डेवलपमेंट’ से आगे बढ़कर ‘पोर्ट-लेड डेवलपमेंट’ का विजन
भारत की समुद्री शक्ति को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ने समग्र दृष्टिकोण अपनाने को कहा। उन्होंने याद दिलाया कि पोत निर्माण (Shipbuilding) को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जा चुका है, और अब यह सुनिश्चित करना होगा कि इसके लक्ष्य मिशन मोड में पूरे हों।
पीएम ने बंदरगाहों के विकास से एक कदम आगे बढ़कर ‘पोर्ट-आधारित विकास’ (Port-led Development) की जरूरत दोहराई।
साथ ही, विनिर्माण (Manufacturing) और निर्यात इकाइयों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने पर जोर दिया।
अधिकारियों में ‘टीम स्पिरिट’ विकसित करने की नसीहत
अपने संबोधन के अंत में, प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों से अपने कनिष्ठ (Junior) सहयोगियों के साथ अधिक व्यक्तिगत और अनौपचारिक संवाद स्थापित करने की अपील की, ताकि विभागों और कैडरों के बीच एक मजबूत नेटवर्क व टीम भावना विकसित हो सके।
इस बैठक में कैबिनेट सचिव, पीएमओ के वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख मंत्रालयों के सचिव उपस्थित रहे, जिन्होंने क्षेत्रवार प्राथमिकताओं और उभरती चुनौतियों पर अपने अनुभव भी साझा किए।











