त्योहारों से पहले चीनी पर सरकार का एक्शन, लागू की स्टॉक लिमिट
त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का प्रहार, जमाखोरी रोकने के लिए उठाए कड़े कदम”
नई दिल्ली : संतोष सेठ की रिपोर्ट : THE POLITICS AGAIN
हाल के हफ्तों में चीनी की कीमतों में आए भारी उछाल को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है।
20 जुलाई 2026 को ₹48.18 प्रति किलोग्राम बिकने वाली चीनी 20 अगस्त तक ₹55.70 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई।
त्योहारी सीजन में आम जनता को महंगाई से बचाने और चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट तय करने और ड्यूटी-फ्री आयात जैसे कई बड़े कदम उठाए हैं।
कीमतें बढ़ने का असली कारण क्या है?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण चीनी महंगी नहीं हुई है, क्योंकि इथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन 12% से घटकर 9% हो गया है और अब 75% इथेनॉल मक्के से बन रहा है। कीमतों में उछाल के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
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उत्पादन में कमी: गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी तथा जलभराव के कारण शुरुआती 343 LMT (लाख मीट्रिक टन) के अनुमान के मुकाबले उत्पादन 306 LMT रहने की उम्मीद है।
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वैश्विक संकट: वैश्विक स्तर पर चीनी की 33 LMT कमी का अनुमान है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें $474 से उछलकर $552 प्रति टन हो गई हैं।
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जमाखोरी: त्योहारों से पहले मुनाफाखोरी के लिए उद्योग के कुछ हिस्सों द्वारा की जा रही सट्टेबाजी और जमाखोरी।
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स्टॉक लिमिट: देशभर में चीनी डीलरों पर 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू कर दी गई है।
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थोक उपभोक्ताओं पर सख्ती: 1 सितंबर से कोई भी थोक उपभोक्ता 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा।
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भौतिक सत्यापन: जमाखोरी पकड़ने के लिए केंद्र और राज्य की संयुक्त टीमें मिलों में चीनी स्टॉक की ग्राउंड चेकिंग कर रही हैं।
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ड्यूटी-फ्री आयात: घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए एहतियातन 10 LMT कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी गई है।
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जल्द पेराई: राज्यों और मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से ही गन्ने की पेराई शुरू करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अक्टूबर में उत्पादन 3-4 LMT से बढ़कर 10 LMT तक पहुंच सके।
इथेनॉल कार्यक्रम की बदौलत 2025-26 सीजन के लिए गन्ना किसानों का 97% बकाया चुकाया जा चुका है और मिलों को 2021-22 के बाद से किसी सब्सिडी की जरूरत नहीं पड़ी है।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वह उपभोक्ताओं और किसानों, दोनों के हितों की रक्षा के लिए बाजार के तौर-तरीकों पर कड़ी नजर रखेगी।











