PM Modi Speech Full Text Hindi

PM मोदी का बड़ा संदेश: ‘साउथ ब्लॉक गुलामी का प्रतीक था, सेवा तीर्थ जनता की आकांक्षाओं का केंद्र’; जानें भाषण की 10 बड़ी बातें

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नए PMO परिसर ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ का उद्घाटन करते हुए देश को एक भावुक और दूरदर्शी संदेश दिया”

नई दिल्ली: THE POLITICS AGAIN : शिल्पा की रिपोर्ट 

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि यह केवल जगह का बदलाव नहीं है, बल्कि यह “गुलामी की मानसिकता” से “सेवा की भावना” की ओर एक ऐतिहासिक बदलाव है।

 

गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति

पीएम मोदी ने कहा कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक थे। उनका निर्माण भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़ने और ब्रिटिश महाराजा की सोच को लागू करने के लिए किया गया था।

वे इमारतें रायसीना हिल्स पर इसलिए बनाई गई थीं ताकि वे आम जनता से ऊपर दिखें। इसके विपरीत, ‘सेवा तीर्थ’ जमीन से जुड़ा है और यह 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं का केंद्र है।

पुराने भवनों का क्या होगा?

पीएम मोदी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि पुराने संसद भवन की तरह ही साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक के पुराने भवनों को ‘युगे युगीन भारत म्यूजियम’ में बदला जाएगा। यह आने वाली पीढ़ियों को भारत के इतिहास और विरासत से रूबरू कराएगा।

1500 करोड़ रुपये की बचत

नए भवनों की व्यावहारिक जरूरत बताते हुए पीएम ने कहा कि अभी तक सरकार के मंत्रालय 50 अलग-अलग जगहों से चल रहे थे, जिससे हर साल 1500 करोड़ रुपये किराए में खर्च होते थे। नए परिसर से यह पैसा बचेगा और कामकाज की गति बढ़ेगी।

शासन नहीं, सेवा

पीएम ने अधिकारियों को मंत्र दिया— “हम यहां अधिकार दिखाने नहीं, जिम्मेदारी निभाने आए हैं।” उन्होंने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ में लिया गया हर फैसला “नागरिक देवो भव” की भावना से प्रेरित होना चाहिए।


भाषण की 10 बड़ी बातें (Top 10 Highlights)

  1. नाम का अर्थ: नए PMO का नाम ‘सेवा तीर्थ’ इसलिए रखा गया है क्योंकि शासन का अर्थ ही सेवा है। ‘तीर्थ’ वह है जो लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक हो।

  2. ब्रिटिश सोच vs भारतीय सोच: पुरानी इमारतें ‘शासक’ (Ruler) की मानसिकता से बनी थीं, नई इमारतें ‘सेवक’ (Server) की मानसिकता से बनी हैं।

  3. म्यूजियम की घोषणा: पुराना नॉर्थ और साउथ ब्लॉक अब देश का ऐतिहासिक म्यूजियम बनेगा।

  4. लॉजिस्टिक्स और उत्पादकता: रोज 8-10 हजार कर्मचारियों का आवागमन आसान होगा, जिससे उत्पादकता (Productivity) बढ़ेगी।

  5. नाम बदलने का तर्क: राजपथ को ‘कर्तव्य पथ’, रेस कोर्स को ‘लोक कल्याण मार्ग’ और पुराने संसद को ‘संविधान सदन’ नाम देना गुलामी के निशान मिटाने का प्रयास है।

  6. विकसित भारत 2047: ये इमारतें 2047 के विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने का कार्यस्थल बनेंगी।

  7. नागरिक देवो भव: पीएम ने कहा कि हर फाइल पर साइन करते समय अधिकारी सोचें कि इससे आम आदमी का जीवन कितना आसान होगा।

  8. आत्ममंथन: अधिकारियों से अपील की— “जब आप रिटायर हों, तो गर्व से कह सकें कि मैंने यहां हर दिन देश की सेवा की।”

  9. अमृत काल की जरूरत: 100 साल पुरानी इमारतें आधुनिक टेक्नोलॉजी और सुविधाओं के लिए नाकाफी साबित हो रही थीं।

  10. शुभ मुहूर्त: उद्घाटन ‘विजया एकादशी’ के पावन अवसर पर किया गया, जो विजय का प्रतीक है।