पीएम मोदी ने बताया आदर्श शिक्षक का गुण, शेयर किया संस्कृत श्लोक
PM मोदी ने बताया कौन होता है ‘आदर्श शिक्षक’, X पर खास संस्कृत श्लोक साझा कर दी श्रेष्ठ गुरु की परिभाषा “
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
एक ‘आदर्श शिक्षक’ (Ideal Teacher) में क्या गुण होने चाहिए और समाज में सर्वोच्च गुरु का स्थान किसे मिलना चाहिए? इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने एक बेहद गहरा और प्रेरक संदेश साझा किया है।
सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक प्राचीन ‘संस्कृत सुभाषितम्’ (संस्कृत श्लोक) शेयर किया।
इस श्लोक के माध्यम से पीएम ने स्पष्ट किया कि केवल ज्ञान होना ही काफी नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को दूसरों तक पहुंचाने की कला ही एक व्यक्ति को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक बनाती है।
क्या है वह श्लोक जो PM मोदी ने किया शेयर?
प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल पर यह संस्कृत सुभाषितम् साझा किया:
“श्लिष्टा क्रिया कस्यचिदात्मसंस्था सङ्क्रान्तिरन्यस्य विशेषयुक्ता। यस्योभयं साधु स शिक्षकाणां धुरि प्रतिष्ठापयितव्य एव।।”
श्लोक का अर्थ: दो गुणों का संगम है सर्वश्रेष्ठ शिक्षक
इस श्लोक का अर्थ समझाते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि समाज में मुख्य रूप से दो तरह के प्रतिभाशाली लोग होते हैं।
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आत्म-निपुणता (Self-Mastery): कुछ लोग स्वयं किसी कार्य को करने या किसी विषय में अत्यधिक कुशल और ज्ञानी होते हैं।
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सिखाने की कला (Teaching Ability): वहीं, कुछ अन्य लोग ऐसे होते हैं जो ज्ञान या कौशल को दूसरों को सिखाने में विशेष रूप से निपुण होते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि जिस व्यक्ति में ये दोनों गुण एक साथ समाहित हों—यानी वह अपने विषय में महारत (Mastery) भी रखता हो और उसे दूसरों को प्रभावी ढंग से सिखाने की अद्भुत क्षमता भी रखता हो—उसे ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों की श्रेणी में सबसे उच्च और प्रथम स्थान दिया जाना चाहिए।
युवाओं और शिक्षकों के लिए बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री का यह पोस्ट शिक्षा जगत (Education Sector) से जुड़े लोगों, शिक्षकों और युवाओं के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत है।
यह संदेश इस बात पर जोर देता है कि ज्ञान को अपने तक सीमित रखने के बजाय, उसे प्रभावी ढंग से नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही एक सच्चे गुरु का सबसे बड़ा धर्म और समाज के प्रति उनका असली योगदान है।











