पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित, दिया आत्मनिर्भर भारत का संदेश
पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित, # सेवा के 12 साल का जिक्र कर बताए ‘सच्चे बुद्धिमान’ के गुण “
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार (9 जून 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक संस्कृत सुभाषित (Shloka) साझा कर राष्ट्र निर्माण और समाज कल्याण का बड़ा संदेश दिया है।
राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण और सेवाभाव हमारी अमूल्य पूंजी रही है। बीते 12 वर्षों में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से प्रेरित निरंतर प्रयासों से ही आज हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर हैं। #12YearsOfSeva
आर्यकर्मणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते।
हितं च… pic.twitter.com/wDM9MC4n2Y
— Narendra Modi (@narendramodi) June 9, 2026
‘The Politics Again’ की राष्ट्रीय डेस्क के अनुसार, इस श्लोक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने समाज की भलाई के लिए समर्पित एक सच्चे और बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों पर प्रकाश डाला है।
साथ ही, उन्होंने अपनी सरकार के 12 साल पूरे होने पर ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को भी दोहराया है।
‘सेवा भाव हमारी अमूल्य पूंजी’: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने अपने 12 वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों को राष्ट्र की सामूहिक शक्ति से जोड़ते हुए ‘एक्स’ (X) पर लिखा:
“राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण और सेवा भाव हमारी अमूल्य पूंजी रही है। बीते 12 वर्षों में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से प्रेरित निरंतर प्रयासों से ही आज हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की ओर से अग्रसर हैं। #सेवाके 12साल”
पीएम मोदी द्वारा साझा किया गया संस्कृत श्लोक:
आर्यकर्माणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते। हितं च नाभ्यसुयन्ति स वै पण्डित उच्यते॥
क्या है इस श्लोक का अर्थ? (एक सच्चे बुद्धिमान की पहचान)
प्रधानमंत्री ने इस प्राचीन सुभाषित के निहितार्थ को भी स्पष्ट किया। इस श्लोक के अनुसार, वास्तव में ‘बुद्धिमान’ (पंडित) वही व्यक्ति कहलाता है जिसके भीतर निम्नलिखित गुण होते हैं:
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सदाचार: जो व्यक्ति हमेशा नेक और सदाचारी कार्यों में लगा रहता है।
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समाज कल्याण: जो समाज की प्रगति और भलाई के लिए पूरी तरह से समर्पित रहता है।
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सम्मान की भावना: जो दूसरों के लाभकारी वचनों और अच्छे कार्यों का हृदय से सम्मान करता है।
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दुर्भावना से दूर: जिसके मन में दूसरों के प्रति कोई ईर्ष्या या दुर्भावना नहीं होती है।
प्रधानमंत्री का यह ट्वीट ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अपने कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में जन-जागरूकता और कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार का महाअभियान चला रही है। यह श्लोक इसी ‘सेवा’ और ‘समर्पण’ की भावना को रेखांकित करता है।











