संसद भवन परिसर और मानसून सत्र के दौरान की हलचल

संसद मानसून सत्र: सरकार और विपक्ष में टकराव के आसार

मानसून सत्र में हंगामे के आसार: सरकार बनाम विपक्ष, कई विवादास्पद मुद्दों पर आर-पार की तैयारी”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है, जिसके काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं। सरकार जहां अपने महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश में है, वहीं विपक्षी दल नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की ठोस रणनीति बना रहे हैं।

सरकार की प्राथमिकताएं और ‘परिसीमन बिल’ पर सस्पेंस

सरकार इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में है। हालांकि, लंबे समय से चर्चा में रहने वाले ‘परिसीमन संबंधित संविधान संशोधन विधेयक’ को अभी तक विधायी एजेंडे में औपचारिक रूप से शामिल नहीं किया गया है।

इसके बावजूद, भाजपा नेतृत्व वाला राजग (NDA) इसे पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में सक्रिय है।

सरकार की प्राथमिकता विधेयकों को पारित कराने की होगी, जिसमें एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक और ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ प्रमुख हैं। सरकार का रुख ‘आक्रामक’ रहने की संभावना है।

विपक्ष की घेराबंदी: प्रमुख मुद्दे

विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे सदन में निम्नलिखित मुद्दों को उठाएंगे:

  • नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक: प्रदर्शनकारी इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

  • संस्थानों पर कथित कब्जा और राजनीतिक दलों को तोड़ने का प्रयास।

  • घोटाले, भ्रष्टाचार और महंगाई।

  • विदेश नीति की विफलताएं और पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण जैसे मुद्दे।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: विपक्ष अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी उठाएगा, हालांकि सरकार इसे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला बताकर बचाव कर सकती है।

सदन में बैठने की व्यवस्था और राजनीतिक खींचतान

सत्र की शुरुआत कई बड़े विवादों के साये में हो रही है। जंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) का प्रस्तावित मार्च और कुछ दलों में टूट के बाद बने नए राजनीतिक समीकरण सत्र को और दिलचस्प बनाएंगे।

  • टीएमसी और शिवसेना का मामला: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के विलय और शिवसेना (UBT) के सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के दावों पर निर्णय लेना है।

  • यदि अध्यक्ष बागी सांसदों के पक्ष में फैसला लेते हैं, तो लोकसभा में राजग (NDA) की संख्या बढ़ जाएगी, हालांकि यह संख्या दो-तिहाई बहुमत (360 सांसदों) से अभी भी कम रहेगी।

राज्यसभा में भी दो-तिहाई बहुमत के लिए राजग को कुछ सीटों की कमी है, ऐसे में देखना होगा कि विपक्षी दलों के मतदान में अनुपस्थिति का क्या असर पड़ता है।