मई 2025 के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय वायुसेना का स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल प्रहार और पाकिस्तान के मिसाइल हमले को हवा में ही नाकाम करता 'बराक-8' एयर डिफेंस सिस्टम। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
सम्पादकीय: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का सच— नए भारत का शौर्य और पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा का पर्दाफाश”
नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की विशेष रिपोर्ट
हाल ही में डिस्कवरी पर प्रसारित डॉक्यूमेंट्री “Declassified: Operation Sindoor” ने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के जो तथ्य दुनिया के सामने रखे हैं, उन्होंने रावलपिंडी और इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है।
यह डॉक्यूमेंट्री केवल एक सैन्य अभियान का विवरण नहीं है, बल्कि यह उस ‘नए भारत’ के सामरिक आत्मविश्वास का जीवंत दस्तावेज है, जो अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने और दुश्मन को उसी की भाषा में जवाब देने का माद्दा रखता है।
पाकिस्तान की आधी रात की बौखलाहट यह साबित करती है कि सच के तीर सीधे निशाने पर लगे हैं।
10 मई की रात पाकिस्तान ने दिल्ली की ओर हाई-स्पीड मिसाइल दागकर जो दुस्साहस किया, वह अंततः उसी के लिए आत्मघाती साबित हुआ।
भारतीय वायु रक्षा प्रणाली (बराक-8) ने न केवल उस खतरे को सिरसा के आसमान में नेस्तनाबूद किया, बल्कि इसके बाद भारतीय वायुसेना ने जो पलटवार किया, उसने पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान की कमर तोड़ दी।
जवाबी हमले से घबराकर पाकिस्तानी सेना का वह गुरूर भी टूट गया, जिसका वह अक्सर अपने अवाम के सामने दिखावा करती है।
पाकिस्तान के सैन्य मीडिया विंग (ISPR) द्वारा आनन-फानन में डॉक्यूमेंट्री को “बॉलीवुड शैली का प्रचार” बताना उनकी भारी खीझ को उजागर करता है।
पाकिस्तान का आधिकारिक नैरेटिव खुद उनके ही बुने विरोधाभासों के जाल में फंस गया है। एक तरफ सेना हमलों को विफल बताने का स्वांग रच रही है,
वहीं दूसरी तरफ उनके प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पहले ही रावलपिंडी सहित कई स्थानों पर हुए भारी नुकसान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं।
इतिहास गवाह है कि जो देश मैदान-ए-जंग में हारता है, वह अक्सर प्रोपेगैंडा के मोर्चे पर जीतने का झूठा भ्रम फैलाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का संदेश वैश्विक समुदाय और पड़ोसियों के लिए एकदम स्पष्ट है—भारत की उदारता, संयम और लोकतांत्रिक मूल्यों को उसकी कमजोरी समझने की भूल कभी नहीं की जानी चाहिए।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह स्थापित कर दिया है कि भविष्य में किसी भी उकसावे की स्थिति में ‘एस्केलेशन लैडर’ (तनाव का स्तर) भारत के ही नियंत्रण में होगा। भारत कब, कहाँ और कितनी ताकत से प्रहार करेगा, यह वह स्वयं तय करेगा।
कुल मिलाकर, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शौर्य गाथा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब ‘डिफेंसिव’ मुद्रा से बाहर आकर ‘सक्रिय रक्षा’ (Active Defense) की नीति पर मजबूती से कायम है।
पाकिस्तान के लिए यह एक ऐसा कड़वा सबक है, जिसे वह न तो कभी भूल पाएगा और न ही दुनिया के सामने कभी स्वीकार कर पाएगा।
मई 2025 के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति और भारत की सामरिक नीति में भी एक युगांतरकारी बदलाव ला दिया है।
आइए समझते हैं कि इस ऐतिहासिक घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय मंचों और भारत की रक्षा रणनीति को कैसे एक नई दिशा दी है।
इस सैन्य कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत, आक्रामक और निर्णायक बनकर उभरी है:
‘ऑपरेशन सिंदूर’ इस बात का सबसे बड़ा घोषणापत्र है कि भारत अब अपनी पुरानी ‘रणनीतिक संयम’ (Strategic Restraint) की नीति को हमेशा के लिए दफना चुका है:
इस आक्रामक रक्षा नीति और सफल कूटनीति ने पूरे दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन को भारत के पक्ष में झुका दिया है।
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