चार्जशीट के बाद सीधी गिरफ्तारी नहीं, कोर्ट ने बताए नए नियम: जौनपुर कलेक्ट्रेट में ‘बच्ची देवी बनाम स्टेट’ आदेश पर मंथन

“जनपद न्यायालय परिसर स्थित कलेक्ट्रेट अधिवक्ता संघ में एक महत्वपूर्ण विधिक साक्षरता और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया”

जौनपुर: ‘The Politics Again’ संतोष सेठ की रिपोर्ट 

यह कार्यक्रम माननीय जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के निर्देशन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रशांत कुमार सिंह की देखरेख में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माननीय उच्च न्यायालय द्वारा ‘बच्ची देवी बनाम स्टेट’ (Misc. Criminal Application No. 6400/2025) में 12 अगस्त 2025 को पारित आदेश और ‘ट्रांसलेशन जजमेंट्स’ (अनुवादित निर्णयों) के उपयोग के बारे में अधिवक्ताओं और वादकारियों को जागरूक करना था।

अगर विवेचना में गिरफ्तारी नहीं, तो चार्जशीट पर जेल नहीं

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक आदेश की बारीकियों को समझाया।

उन्होंने बताया कि ‘बच्ची देवी बनाम स्टेट’ मामले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में विवेचना (Investigation) के दौरान अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, वहां ट्रायल कोर्ट को सीधे जेल भेजने के बजाय उदार दृष्टिकोण अपनाना होगा।

डॉ. सिंह ने कानून के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला:

  • संवैधानिक अधिकार: संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 227 के तहत नागरिकों के अधिकारों की रक्षा जरूरी है।

  • BNSS की धारा 91: भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 91 के तहत, यदि अभियुक्त न्यायालय में उपस्थित होता है, तो उसे व्यक्तिगत बंध पत्र (Personal Bond) पर छोड़ने के प्रावधानों पर विचार किया जाना अनिवार्य है।

  • धारा 528 की प्रक्रिया: डॉ. सिंह ने बताया कि भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा 528 में दी गई प्रक्रिया का पालन करना भी आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट के नजीरों (Precedents) का पालन अनिवार्य

जागरूकता शिविर में बताया गया कि न्यायालयों को सत्येंद्र कुमार अंटील, सिद्धार्थ, सुशील अग्रवाल और गुरबख्श सिंह शिवा जैसे लैंडमार्क जजमेंट्स में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।

इसके अलावा, BNSS की धारा 230 और 231 के तहत मुकदमों का विचारण (Trial) बिना किसी विलंब के किया जाएगा।

निगरानी और प्रशिक्षण की व्यवस्था आदेश के कड़ाई से पालन के लिए एक निगरानी तंत्र भी बनाया गया है:

  1. संयुक्त निदेशक अभियोजन: प्रत्येक जिले में ऐसे मुकदमों की कार्यवाही और अभिलेखों की देखरेख करेंगे।

  2. मासिक रिपोर्ट: सभी जनपद न्यायाधीश इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय को मासिक रिपोर्ट भेजेंगे।

  3. प्रशिक्षण: न्यायिक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (JTRI), लखनऊ द्वारा न्यायिक अधिकारियों को इस संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

अधिवक्ताओं की भारी उपस्थिति

कार्यक्रम में कलेक्ट्रेट अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष घनश्याम सिंह और महामंत्री मनोज मिश्रा ने मुख्य वक्ता डॉ. दिलीप कुमार सिंह का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

इस अवसर पर पैरा लीगल वालंटियर सुभाष यादव, काली प्रसाद सिंह, विनोद कुमार श्रीवास्तव, एडवोकेट विनय कुमार उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ता और वादकारी मौजूद रहे। मंच संचालन महामंत्री ने किया और अध्यक्ष ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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