नेपाल के सुंसारी और सिराहा जिले में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद कई इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है। स्थिति को काबू में करने के लिए नेपाली सेना की तैनाती की गई है।
नेपाल में सुलगी सांप्रदायिक हिंसा की आग: 2 की मौत, कई जिलों में कर्फ्यू; भारत-बिहार सीमा पर व्यापार और जनजीवन ठप”
काठमांडू/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पड़ोसी देश नेपाल में बीते तीन दिनों से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। नेपाल के सुंसारी (Sunsari) जिले से भड़की सांप्रदायिक हिंसा की आग अब कोशी और मधेस प्रांत के चार अलग-अलग जिलों तक फैल गई है।
झंडे और डीजे (DJ) के विवाद से शुरू हुए इस बवाल में अब तक 2 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सुरक्षाकर्मियों समेत 24 से ज्यादा लोग घायल हैं।
हालात को बेकाबू होता देख नेपाल प्रशासन ने कई जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है और स्थिति संभालने के लिए नेपाली सेना (Nepal Army) व बख्तरबंद वाहनों को तैनात किया गया है।
चूंकि हिंसा प्रभावित इलाके भारतीय सीमा (खासकर बिहार) से सटे हुए हैं, इसलिए भारत में भी इसे लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है।
नेपाल के सुंसारी जिले के देवानगंज (कप्तानगंज) में इस हिंसा की शुरुआत 26 जुलाई को हुई।
झंडे और डीजे का विवाद: कुछ असामाजिक तत्वों ने बिजली के खंभे पर लगे मुस्लिम समुदाय के झंडे को हटाकर वहां हिंदू झंडा लगा दिया था।
इसके बाद रात में एक मंदिर के बाहर तेज आवाज में बज रहे डीजे को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया, जो जल्द ही पथराव में बदल गया।
पुलिस फायरिंग में मौत: बेकाबू भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सशस्त्र पुलिस बल (APF) ने गोलियां चलाईं, जिसमें 24 वर्षीय युवक ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई। इस मौत के बाद पूरे जिले में दंगे भड़क गए।
सुंसारी जिले से शुरू हुई यह हिंसा धीरे-धीरे इनरुवा, इटहरी और दुहबी होते हुए पड़ोसी मधेस प्रांत के सिराहा और धनुषा जिलों तक फैल गई।
सिराहा जिला: यहां गोलबाजार इलाके में उपद्रवियों ने ‘एबी मॉल’ नाम के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को आग के हवाले कर दिया।
यहां हुए संघर्ष में एक और व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रशासन ने लहान क्षेत्र में भी अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है।
धनुषा जिला: एहतियात के तौर पर जनकपुर, लक्ष्मिनिया हाटबाजार और नगरैन नगर पालिका सहित कई प्रमुख इलाकों में भी कर्फ्यू लगा दिया गया है।
अब तक इस पूरी हिंसा में नेपाल पुलिस के 10, APF के 5 और 9 स्थानीय नागरिक घायल हुए हैं।
नेपाल में यह हिंसा अचानक नहीं भड़की है। तराई क्षेत्र (कोशी और मधेस बेल्ट) में बदलती धार्मिक जनसांख्यिकी लंबे समय से तनाव का कारण रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर नेपाल में मुस्लिम आबादी 5% है, लेकिन मधेस प्रांत में यह 13% है। हिंदू-मुस्लिम आबादी यहां बेहद करीब रहती है।
सशस्त्र पुलिस बल (APF) ने 3 साल पहले ही सरकार को खुफिया रिपोर्ट दी थी कि कुछ चरमपंथी समूह जानबूझकर ‘वोट-बैंक’ की राजनीति के तहत छोटे विवादों (सड़क रोकना, लाउडस्पीकर) को सांप्रदायिक रंग देकर दंगे भड़काने की साजिश रच रहे हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने इस चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया।
नेपाल की संसद में इस मुद्दे पर भारी राजनीतिक घमासान मच गया है। पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ (NCP), नेपाली कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और गृह मंत्री सुदान गुरुंग की कड़ी आलोचना की है।
विपक्ष ने सवाल उठाया कि देश जल रहा है और पीएम व गृह मंत्री सर्वदलीय बैठक से गायब हैं। साथ ही, पुलिस द्वारा आंसू गैस की जगह सीधे गोलियां चलाने (फायरिंग) पर भी सवाल उठाए गए हैं।
वहीं, नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र बीर बिक्रम शाह ने भी नेपाली नागरिकों से देश की पुरानी बहु-सांस्कृतिक और शांतिपूर्ण परंपरा को बनाए रखने की अपील की है।
नेपाल का यह अशांत सुंसारी जिला भारत के बिहार राज्य की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है। यह दोनों देशों के बीच एक बहुत अहम व्यापारिक कॉरिडोर है।
कर्फ्यू और हिंसा के कारण बॉर्डर पर आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। सीमा के दोनों ओर बसे परिवारों के बीच पीढ़ियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ और व्यापारिक रिश्ते हैं।
आम दिनों में लोग रोजमर्रा की खरीदारी के लिए सीमा पार करते हैं, लेकिन फिलहाल व्यापारिक गतिविधियों से लेकर यातायात तक सब कुछ पूरी तरह से रुक गया है।
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