नीट विवाद: केंद्र और CJP के बीच वार्ता अटकी, 2 शर्तों पर अड़ी सरकार
नीट विवाद: केंद्र और CJP के बीच प्रस्तावित वार्ता अधर में लटकी, CJP की 2 शर्तों पर अड़ी सरकार”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
नीट (NEET) पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधारों को लेकर केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारी संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बीच प्रस्तावित बातचीत अधर में लटक गई है।
जंतर-मंतर पर व्यापक छात्र आंदोलन की अगुवाई कर रही CJP द्वारा रखी गई दो सख्त शर्तों के कारण दोनों पक्षों के बीच गतिरोध (Deadlock) कायम हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, हालांकि सोनम वांगचुक ने मंत्री के इस्तीफे की मांग छोड़ दी थी, लेकिन CJP प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत शुरू करने के लिए अपनी पुरानी शर्तों को दोहराया है, जिस पर केंद्र सरकार फिलहाल सहमत नहीं है।
CJP की वो 2 शर्तें, जिन पर फंसा पेच
सरकारी सूत्रों ने गुरुवार को जानकारी दी कि CJP प्रतिनिधिमंडल ने औपचारिक बातचीत की मेज पर आने से पहले दो प्रमुख शर्तें रखी हैं:
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शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्र सरकार पहले शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर फैसला ले।
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सार्वजनिक बातचीत (Public Dialogue): केंद्र सरकार के साथ कोई भी बातचीत बंद कमरों में नहीं, बल्कि जंतर-मंतर पर सार्वजनिक रूप से सभी के सामने आयोजित की जाए।
सरकारी सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि केंद्र सरकार को ये दोनों ही पूर्व शर्तें (Pre-conditions) मंजूर नहीं हैं।
सरकार का मानना है कि बातचीत बिना किसी पूर्व शर्त के और सौहार्दपूर्ण माहौल में होनी चाहिए।
नड्डा की पहल और जेपी नड्डा का रुख
हाल ही में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने CJP के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी और उनसे आंदोलन खत्म करने की अपील करते हुए भरोसा दिया था कि सरकार बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है।
‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बाद जेपी नड्डा ने अस्पताल जाकर घायल प्रदर्शनकारियों का हाल-चाल भी जाना था।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि सरकार की तरफ से संवाद के दरवाजे हमेशा खुले हैं, लेकिन इसके साथ ही पार्टी ने विपक्ष पर इस छात्र आंदोलन का राजनीतिकरण (Politicization) करने का आरोप भी लगाया है।
बीच का रास्ता निकालने की कोशिश जारी
गतिरोध के बावजूद, सूत्रों का कहना है कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। दोनों पक्षों के बीच कोई ‘बीच का रास्ता’ (Middle Ground) निकालने की कोशिशें पर्दे के पीछे से जारी हैं, ताकि औपचारिक बातचीत का रास्ता साफ हो सके।
केंद्र सरकार बातचीत के पक्ष में है, लेकिन उसकी स्पष्ट मांग है कि वार्ता टेबल पर आने से पहले ऐसी शर्तें न रखी जाएं।











