नीट विवाद: राहुल गांधी की एंट्री से बैकफुट पर सरकार, वांगचुक से मिले नड्डा
नीट विवाद: राहुल गांधी की ‘एंट्री’ से बैकफुट पर सरकार, औंधे मुंह गिरी पुरानी रणनीति, 23 दिन बाद आई वांगचुक की याद”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
नीट (NEET) पेपर लीक मामले और छात्रों के उग्र प्रदर्शन से निपटने के लिए बनाई गई केंद्र सरकार की रणनीति एक-एक कर औंधे मुंह गिर गई है।
जंतर-मंतर पर सीमित भीड़ देखकर निश्चिंत बैठी सरकार को अब अचानक अपनी पूरी रणनीति बदलनी पड़ी है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रधानमंत्री आवास के बाहर दिया गया हाई-वोल्टेज धरना बना।
राहुल की एंट्री के बाद सरकार न सिर्फ रक्षात्मक मुद्रा में आ गई, बल्कि महीनों से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक और घायल छात्रों का दरवाजा खटखटाने को भी मजबूर हो गई है।
राहुल गांधी के धरने से राजनीतिक हुआ आंदोलन
सूत्रों के मुताबिक, सरकार के रणनीतिकार इस छात्र आंदोलन के प्रभाव का सही अनुमान लगाने में पूरी तरह विफल रहे।
शुरुआत में जंतर-मंतर पर गिने-चुने लोगों की मौजूदगी से सरकार को लगा कि यह आंदोलन जल्द ही शांत हो जाएगा।
लेकिन देश के विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से युवाओं में जो गुस्सा था, उसे सरकार भांप नहीं पाई।
सोमवार को ‘संसद मार्च’ और मंगलवार को राहुल गांधी के सीधे पीएम आवास पहुंचने से इस चेहरा विहीन आंदोलन को एक बड़ा राजनीतिक चेहरा मिल गया। सरकार को अहसास हो गया कि अब यह आंदोलन पूरे देश में एक नया और उग्र रूप ले सकता है।
23 दिन बाद आई सोनम वांगचुक की याद
सरकार के रुख में आया यह बदलाव साफ तौर पर देखा जा सकता है।
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सोमवार को जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रतिनिधि आशुतोष रांका और सौरव दास केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने गए, तो उन्हें महज़ 10 मिनट की मुलाकात के लिए दो घंटे तक इंतज़ार कराया गया।
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लेकिन राहुल के धरने के महज़ 24 घंटे के भीतर परिस्थितियां ऐसी बदलीं कि खुद जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को अनशन के 24वें दिन सोनम वांगचुक से मिलने अस्पताल पहुंचना पड़ा और उनसे भूख हड़ताल खत्म करने की गुहार लगानी पड़ी।
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इसके अलावा, मंत्रियों ने आंदोलन के दौरान घायल हुए युवाओं से मुलाकात के लिए अस्पतालों के भी चक्कर लगाए।
विपक्ष की नई शर्त: पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, फिर चर्चा
बैकफुट पर आई सरकार ने बुधवार को पहली बार इस पूरे मुद्दे पर संसद में विपक्ष की मांग के अनुरूप चर्चा करने पर हामी भर दी है।
लेकिन मौके की नज़ाकत और अपनी मज़बूत स्थिति को देखते हुए विपक्ष ने अब चर्चा के लिए एक बड़ी शर्त रख दी है।
विपक्ष की मांग है कि चर्चा से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना होगा।
65 सांसदों की अपील, क्या अनशन तोड़ेंगे वांगचुक?
इसी बीच, सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा कर बताया है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है।
वांगचुक ने लिखा, “सांसदों ने मुझे याद दिलाया है कि देश की सेवा में मुझे अभी भी बहुत काम करना है। मैं उनसे सहमत हूं। मैं जीना चाहता हूं और अपने छात्रों, शिक्षा और उस काम में वापस लौटना चाहता हूं जिसने मेरे जीवन को परिभाषित किया है।”
इस बयान के बाद माना जा रहा है कि सरकार से सकारात्मक आश्वासन मिलने पर वे जल्द ही अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं।











