राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के तीन वर्ष पूरे : भारत की आपूर्ति श्रृंखला इको-सिस्‍टम में अभूतपूर्व बदलाव

“प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2022 को शुरू की गई राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (एनएलपी) की तीसरी वर्षगांठ को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) मना रहा है”

नई दिल्ली 17 / 09 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

एनएलपी ने पिछले तीन वर्षों में लॉजिस्टिक्स इको-सिस्‍टम में सुधारों को गति दी है। इससे डिजिटल एकीकरण, कौशल विकास, नीति संरेखण और बुनियादी ढांचा नियोजन में सुधार हुआ है। इन पहलों ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में दक्षता बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति सॉफ्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने, डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने, मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देने और नियामक सुधारों को सक्षम बनाने पर केंद्रित है।

इसके प्रमुख उद्देश्य लॉजिस्टिक्स लागत को वैश्विक मानकों के अनुरूप कम करना, लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (एलपीआई) में वर्ष 2030 तक शीर्ष 25 में भारत की रैंकिंग को सुधारना और एक कुशल एवं एकीकृत लॉजिस्टिक्स इको-सिस्‍टम सुनिश्चित करने के लिए एक मज़बूत, डेटा-संचालित निर्णय समर्थन प्रणाली स्थापित करना है।

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (2022-2025) के तहत प्रमुख उपलब्धियों में यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) शामिल है। इसने 30 से अधिक डिजिटल प्रणालियों में सुरक्षित एपीआई एकीकरण की सुविधा प्रदान की है, ताकि अगस्त 2025 तक 160 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन संभव हो सके।

लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक ने 101 अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) में 75   मिलियन से अधिक एक्जिम कंटेनरों पर नज़र रखी है। इससे वास्तविक समय में दृश्यता मिलती है और लॉजिस्टिक्स संचालन सुव्यवस्थित होता है।

विभिन्न राज्यों में रसद सुगमता (एलईएडीएस) सूचकांक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रसद प्रदर्शन का आकलन करता है। 2024 के संस्करण में कॉरिडोर पहुंच और टर्मिनल गति जैसे नए मानदंड शामिल किए गए।

जबकि 2025 के संस्करण में डिजिटल रसद और स्थिरता मानकों को शामिल किया गया। विश्व बैंक के रसद प्रदर्शन सूचकांक में भारत को 38वें स्थान पर पहुंचाने में एलईएडीएस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

लॉजिस्टिक्स उत्कृष्टता, उन्नति और प्रदर्शन शील्ड (एलईएपीएस) पहल एमएसएमई, स्टार्टअप्स और शिक्षा जगत द्वारा लॉजिस्टिक्स में नवाचार को मान्यता देती है, साथ ही ग्रीन लॉजिस्टिक्स और पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ईएसजी) प्रथाओं को बढ़ावा देती है।

इसके अतिरिक्त, डीपीआईआईटी लागत में कमी के लिए कार्यान्वयन योग्य रणनीतियां विकसित करने हेतु राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीईएआर) के साथ साझेदारी में एक लॉजिस्टिक्स लागत मूल्यांकन कर रहा है।

वर्ष 2024 में शुरू किए गए एनसीएईआर के साथ डीपीआईआईटी के सहयोग से लॉजिस्टिक्स लागतों का एक व्यवस्थित, डेटा-आधारित आकलन संभव हुआ है।

अब अपने अंतिम चरण में, इस अध्ययन से नीति नियोजन को सूचित करने और लॉजिस्टिक्स व्यय को अनुकूलित करने के लिए कार्रवाई योग्य अंतर्दृष्टि मिलने की उम्मीद है।

सीमा शुल्क निकासी, कोल्ड स्टोरेज और पैकेजिंग जैसी सेवाओं को एकीकृत करके मल्‍टी-मॉडल परिवहन को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) विकसित किए जा रहे हैं। विभिन्न एजेंसियों को शामिल करते हुए एक एकीकृत ढांचे के तहत योजना और कार्यान्वयन में सामंजस्य स्थापित करने के प्रयास चल रहे हैं।

डिजिटल एकीकरण और व्यापार सुगमता में सुधार हेतु, नीतिगत और नियामक मुद्दों के समाधान हेतु सेवा सुधार समूह (एसआईजी) नामक एक संस्थागत तंत्र की स्थापना की गई।

ई-लॉग्स पोर्टल ने 35 से अधिक लॉजिस्टिक्स और उद्योग संघों को अपने साथ जोड़ा है और हितधारकों द्वारा प्रस्तुत 140 में से 100 मुद्दों का सफलतापूर्वक समाधान किया है।

हरित और टिकाऊ लॉजिस्टिक्स की खोज में, भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलोर ने परिवहन उत्सर्जन मापन उपकरण (टीईएमटी) विकसित किया है, जो आईएसओ 14083 मानकों के अनुरूप एक क्लाउड-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है।

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति भी लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं को हरित प्रथाओं और नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

कौशल विकास और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है। अब 100 से ज़्यादा विश्वविद्यालय और संस्थान लॉजिस्टिक्स से संबंधित पाठ्यक्रम प्रदान कर रहे हैं।

एसपीए, भोपाल स्थित सिटी लॉजिस्टिक्स उत्कृष्टता केंद्र ने 100 से ज़्यादा अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है, जबकि 2023 और 2025 के बीच 65,000 से ज़्यादा पेशेवरों को नए योग्यता पैकेज स्वीकृत किए गए हैं।

इसके अलावा, गतिशक्ति विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन ने स्नातक और स्नातकोत्तर लॉजिस्टिक्स कार्यक्रमों की शुरुआत में मदद की है। सरकारी अधिकारियों के लिए 250 से ज़्यादा कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं, जिन्हें iGoT प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध डिजिटल पाठ्यक्रमों द्वारा पूरक बनाया गया है।

कुशल रसद के लिए क्षेत्रीय नीति (एसपीईएल) का उद्देश्य कोयला, सीमेंट, इस्पात, खाद्य प्रसंस्करण और फार्मास्यूटिकल्स जैसे उद्योगों के लिए अनुकूल, लचीला, क्षेत्र-विशिष्ट रसद ढांचा तैयार करना है।

एसपीईएल बहुविध परिवहन, लागत में कमी और डेटा-आधारित निर्णय लेने को बढ़ावा देता है। अब तक, कोयला रसद नीति और एकीकृत कोयला रसद योजना को अधिसूचित किया जा चुका है, सीमेंट एसपीईएल को अंतिम रूप दिया जा चुका है, और इस्पात, उर्वरक और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों के लिए मसौदा योजनाओं पर काम चल रहा है।

डीपीआईआईटी ने जीआईजेड के सहयोग से लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक अध्ययन शुरू किया है। लॉजिस्टिक्स में लैंगिक समावेशन को बढ़ावा देने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए इस अध्ययन के प्रमुख निष्कर्षों और सिफारिशों की वर्तमान में समीक्षा की जा रही है।

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के अंतर्गत, डीपीआईआईटी ने शहरी लॉजिस्टिक्स योजनाएं (सीएलपी) तैयार करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य यातायात की भीड़भाड़, प्रदूषण और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करते हुए शहरी माल ढुलाई दक्षता को बढ़ाना है। इन दिशानिर्देशों को राज्य कार्य योजनाओं और राज्य लॉजिस्टिक्स नीतियों में एकीकृत किया जा रहा है।

क्षेत्रीय स्तर पर लॉजिस्टिक्स को मज़बूत करने के लिए, सत्ताईस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने राज्य लॉजिस्टिक्स नीतियां तैयार की हैं। वहीं, चौदह राज्य लॉजिस्टिक्स कार्य योजनाएं तैयार कर रहे हैं।

उन्नीस राज्यों ने लॉजिस्टिक्स को उद्योग का दर्जा दिया है, जिससे कर लाभ और प्रोत्साहन प्राप्त हो रहे हैं। नौ राज्यों में नीतियां अभी मसौदा चरण में हैं, और उन्हें समय पर अंतिम रूप देने के प्रयास जारी हैं।

हालांकि, उल्लेखनीय प्रगति हुई है, फिर भी बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने, नियामक सामंजस्य स्थापित करने और छोटे लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के बीच डिजिटल साक्षरता में सुधार लाने में चुनौतियां बनी हुई हैं।

राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय निर्बाध बहुविध एकीकरण प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार सक्रिय हितधारक सहभागिता, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और नवीन वित्तपोषण तंत्रों द्वारा समर्थित, पीएम गतिशक्ति के तहत ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण के माध्यम से इन चुनौतियों पर काबू पाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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