स्वास्थ्य मंत्रालय
मानसून से पहले एक्शन में स्वास्थ्य मंत्रालय: जे.पी. नड्डा ने की डेंगू-मलेरिया से निपटने की तैयारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
आगामी मानसून और उसके बाद के महीनों में मच्छर जनित बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए तैयारियों का जायजा लेना और जन-स्वास्थ्य के मोर्चे पर सक्रिय कदम उठाना था।
बैठक के दौरान श्री नड्डा ने केंद्र, राज्य सरकारों, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच आपसी समन्वय पर जोर दिया ताकि बीमारी के प्रकोप को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देश भर के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों को निम्नलिखित निर्देश दिए:
दवाओं, जांच किट (Diagnostic kits), रक्त के घटकों (Blood components) और अस्पताल के बिस्तरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
मरीजों की संख्या बढ़ने पर भी स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में कोई रुकावट न आए।
डेंगू और मलेरिया के ‘मानक उपचार दिशानिर्देशों’ (Standard Treatment Guidelines) और नैदानिक प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाए।
श्री नड्डा ने कहा कि इन बीमारियों से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार ‘बचाव’ है। उन्होंने संवेदनशील इलाकों में फॉगिंग और मच्छरों के पनपने के स्रोतों को नष्ट करने (Source Reduction) के निर्देश दिए।
इसके अलावा, नागरिकों को साफ-सफाई रखने और घरों के आसपास पानी जमा न होने देने के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान (IEC Campaigns) चलाने का आह्वान किया।
इस काम में आरडब्ल्यूए (RWA), पंचायतों और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
बैठक में भारत द्वारा मलेरिया नियंत्रण में हासिल की गई महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर भी चर्चा की गई:
साल 2015 से 2025 के बीच भारत में मलेरिया के मामलों और इससे होने वाली मौतों में लगभग 80 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
‘वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, भारत 2024 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ‘हाई बर्डन टू हाई इम्पैक्ट’ समूह से बाहर हो गया है।
साल 2022 से 2025 के दौरान देश के 160 जिलों में स्थानीय स्तर पर मलेरिया का एक भी मामला सामने नहीं आया है, जो सरकार की लक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों की सफलता को दर्शाता है।
इस महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव, डीएचआर सचिव और आईसीएमआर (ICMR) महानिदेशक डॉ. राजीव बहल, एनएचएम की अतिरिक्त सचिव व मिशन निदेशक श्रीमती आराधना पटनायक और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) डॉ. लवनीश जी कृष्णा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
वाराणसी के मुढ़ैला में पंखा फैक्ट्री में भीषण अग्निकांड: जहरीले धुएं से मेघना अस्पताल में…
दिल्ली 'थप्पड़ कांड' पर संग्राम तेज: आधी रात को सौरभ भारद्वाज समेत AAP नेता हिरासत…
म्यांमार के रखाइन में सेना का खूनी खेल: विद्रोही गुट के इलाके में भरे बाजार…
यूपी राज्यसभा चुनाव: BJP के 8 सीटों पर जीत के आसार, स्मृति ईरानी, हरीश द्विवेदी…
दिल्ली में प्रदूषण पर 'सर्जिकल स्ट्राइक': 1 नवंबर से निर्माण कार्यों पर रोक, 50% कर्मचारियों…
दिल्ली 'थप्पड़ कांड' में पुलिस का डबल एक्शन: मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ BNS की…