बदायूं में ‘राम नाम’ पर रार: प्रभात फेरी पर पुलिस का लाठीचार्ज, महिलाओं समेत कई घायल; भारी विरोध के बाद बैकफुट पर प्रशासन
“50 साल पुरानी परंपरा को पुलिस ने बताया ‘विवादित’; बजरंग दल के घेराव और हनुमान चालीसा पाठ के बाद झुकी पुलिस, अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग”
[ब्यूरो रिपोर्ट | बदायूं]
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में माघ माह की पवित्र प्रभात फेरी शुक्रवार को रणक्षेत्र में बदल गई। इस्लामनगर थाना क्षेत्र के ग्राम ब्योर कासिमाबाद में पुलिस ने 50 वर्षों से निकल रही प्रभात फेरी को ‘विवादित रास्ता’ बताकर रोकने की कोशिश की, जिससे बवाल मच गया।
पुलिस की सख्ती और ग्रामीणों की आस्था के बीच हुए टकराव में पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें महिलाओं और युवकों समेत कई ग्रामीण घायल हो गए। हालांकि, भारी विरोध और हिंदू संगठनों के हस्तक्षेप के बाद पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा और प्रभात फेरी उसी रास्ते से निकाली गई।
क्या है पूरा मामला?
शुक्रवार (16 जनवरी) की सुबह करीब 5 बजे ग्रामीण माघ माह की नियमित प्रभात फेरी निकाल रहे थे। ग्रामीणों का दावा है कि यह फेरी पिछले 50 वर्षों से इसी रास्ते से निकलती आ रही है।
लेकिन, दूसरे समुदाय की शिकायत के बाद इस्लामनगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और रास्ता बदलने का दबाव बनाने लगी। ग्रामीण अपनी परंपरा पर अड़े रहे।
देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए। मौके पर एसडीएम बिसौली राशि कृष्णा, सीओ बिल्सी और कई थानों (बिल्सी, उघैती) की फोर्स समेत पीएसी बुला ली गई।
सुबह 8 बजे बरसाईं लाठियां
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 8 बजे जब ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तो पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। इस कार्रवाई में भगदड़ मच गई। आरोप है कि पुलिस ने महिलाओं और बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा। घायल ग्रामीणों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया है।
ग्रामीणों ने विशेष रूप से थानाध्यक्ष नरेश कुमार सिंह और सीओ संजीव कुमार पर महिलाओं पर लाठीचार्ज करने और दूसरे समुदाय के इशारे पर काम करने का गंभीर आरोप लगाया है।
हिंदू संगठनों का थाना घेराव और हनुमान चालीसा
पुलिसिया कार्रवाई की खबर फैलते ही बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठन भड़क उठे। दोपहर करीब 1 बजे संगठनों के पदाधिकारी गांव पहुंचे और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने इस्लामनगर थाने का घेराव कर वहीं धरना दिया और ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ शुरू कर दिया। उनकी मांग थी कि लाठीचार्ज करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल कार्रवाई हो।
एसपी देहात की सफाई और बैकफुट पर पुलिस
बवाल बढ़ता देख एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को संभालते हुए स्वीकार किया कि गलतफहमी हुई थी। एसपी देहात ने कहा, “प्रभात फेरी का विरोध हो रहा था, इसलिए रोका गया था। लेकिन बाद में जांच में पता चला कि यह कई वर्षों से इसी रास्ते से निकलती आ रही है। इसके बाद पुलिस ने अपनी मौजूदगी में प्रभात फेरी को उसी रास्ते से संपन्न कराया। अब ग्रामीणों को समझा दिया गया है और भविष्य में कोई रोक नहीं होगी।”
विवाद की जड़: सपा सरकार बनाम 2012 का तर्क
इस विवाद के पीछे दो अलग-अलग तर्क सामने आ रहे हैं:
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पुलिस/दूसरा पक्ष: 10 साल पहले सपा सरकार के दौरान एक समुदाय की आपत्ति पर रास्ता बदला गया था।
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ग्रामीण: साल 2012 में केवल दो साल के लिए रास्ता खराब होने की वजह से रूट बदला गया था, जिसे अब ‘परंपरा’ बदलने का आधार बनाया जा रहा है। रास्ता ठीक होने के बाद से फेरी पुराने मार्ग से ही निकल रही थी।
फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति है और पुलिस बल तैनात है। घायल और उनके परिजन प्रशासन से दोषी पुलिसवालों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।











