मंडी : डीसी ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी, जांच में अभी तक नहीं मिला कुछ
“उपायुक्त कार्यालय परिसर को गुरुवार को ठीक डेढ़ बजे बम से उड़ाने की धमकी भरी ई-मेल से छोटी काशी मंडी में बुधवार को अफरा तफरी का माहौल बन गया। हाल ही में पुलघराट में हुए गोलीकांड की घटना के बाद इस दूसरे बड़े मामले ने सबको हैरान कर दिया। बुधवार सुबह इस मेल को देखने के बाद प्रशासन हरकत में आया और एमरजेंसी का हूटर बजते ही हर कोई अंचभित रह गया”
मंडी 17 / 04 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
देखते ही देखते प्रशासन ने उपायुक्त कार्यालय परिसर, जिला पुलिस अधीक्षक परिसर, जिला न्यायालय भवन और एमर्सन हाउस को तुरंत खाली करने के आदेश दिए। सुबह दस बजे इन सभी सरकारी कार्यालय को खाली करवाने की प्रकिया शुरू हुई और कुछ ही देर में उपायुक्त कार्यालय परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। मैसेज मिलने के बाद धीरे-धीरे सभी कार्यालयों से सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों को बाहर निकाला गया।
इसके साथ जिला न्यायालय से सभी माननीय न्यायधीश, अधिवक्ताओं और अन्य न्यायिक कर्मियों को भी बाहर भेजा गया। पहले तो कर्मचारियों और अधिकारियों को भी समझ नहीं आया कि अचानक पूरे परिसर को खाली क्यों करवाया जा रहा है, लेकिन 11 बजे हूटर बजने और बम रखे जाने की धमकी भरी मेल की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद हर कोई हक्का-बक्का रह गया।
सवेरे डीसी के मेल पर डीसी ऑफिस को बम से उड़ा देने की धमकी मिली । तुंरत इस मेल की जानकारी डीसी मंडी को दी गई। जिसके बाद पूरे प्रशासनिक अमला को सूचित किया गया। पुलिस अधीक्षक को मेल की जानकारी मिलते ही मंडी पुलिस की पूरी टीम डीसी ऑफिस जा पंहुची और तुंरत सभी दफ्तरों को खाली करवाया गया।
इसके बाद जैसै ही डीसी ऑफिस में एमरजेंसी का हूटर बजा तो सभी कर्मचारी दौड़ते हुए अपने अपने दफ्तरों से बाहर दौड़ पड़े। इससे पहले डीसी ऑफिस के प्रशानिक कर्मचारियों को एमरजेंसी का मैसेज आया और तुरंत अपने दफ्तरों से बाहर निकलने को कहा गया। सभी कर्मचारियों को बाहर निकालने के बाद तीनों ओर से डीसी ऑफिस में जाने के मुख्य द्वारों को बंद कर दिया गया।
पहले लगा कि प्रशासन की सरप्राइज मॉकड्रिल
मंडी डीसी कार्यालय के अंदर बम होने की धमकी के बाद जैसे ही प्रशासन ने कर्मचारियों व अधिकारियों को कार्यालय खाली करने के लिए कहा तो सबने पहले इसे हल्के में ही लिया। इतना बड़ा खतरा होने के बाद भी ज्यादातर कर्मी और अन्य लोग बड़े ही आराम से उपायुक्त कार्यालय परिसर से बाहर निकले। सभी को पहले लगा कर प्रशासन कोई सरप्राइज मॉकड्रिल कर रहा है, लेकिन जैसे ही परिसर पुलिस छाबनी में बदल गया और डॉग स्क्वायड के साथ जांच शुरू हुई तो सबको सच्चाई समझ में आई।
लोगों को रोकना पुलिस के लिए चुनौती
बम रखे जाने की बात को लोगों ने हल्के में लिया और कई लोग तो पुलिस से ही जा उलझे। वहीं लोगों ने पुलिस द्वारा दी जा रही हिदायतों को भी अनसुना किया और डीसी ऑफिस के बाहर बैठकर चाय की चुस्कियां ली। हालांकि पुलिस द्वारा बार-बार इन लोगों को यहां ना बैठने के लिए कहा गया। कुछ लोगों का सामान डीसी ऑफिस के अंदर ही छूट गया था। सामान लेने और अंदर जाने के लिए लोग पुलिस से भिड़ पड़े।
लोगों को रोकना पुलिस के लिए चुनौती बन गया था। वहीं कुछ लोगों को इस प्रकरण की जानकारी न होने पर वह डीसी ऑफिस जाने के लिए पुलिस से लड़ पड़े। जिसपर पुलिस ने उन्हें समझाया और वापस घर भेजा। डीसी ऑफिस के तीनों मुख्य द्वारों पर पुलिस का पहरा था ताकि कोई भी व्यक्ति अंदर ना आ सके। लेकिन लोगों ने इस बात को हल्के में लिया। जिसके बाद पुलिस ने जांच के बाद एक-एक व्यक्ति को अंदर सामान लाने के लिए प्रवेश दिया गया। पुलिस के जवान सुबह से ही तीनों मुख्य द्वारों पर पहरा देते नजर आए।
तारों के मकडज़ाल में फंस गई फायर ब्रिगेड की गाड़ी
धमकी मिलने की सूचना मिलने के बाद प्रशासन द्वारा सभी विभागों को अर्लट कर दिया गया था। प्रशासन द्वारा एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, अग्निशमन विभाग की गाड़ी और एंबुलेंस को मौके पर बुलाया गया था। वहीं जब अग्निशमन विभाग की गाड़ी डीसी ऑफिस के बाहर पंहुची तो गाड़ी डीसी ऑफिस के बाहर बने तारों के मकडज़ाल से जा फसी। गाड़ी को निकालने के लिए अग्निशमन विभाग के कर्मचारी को गाड़ी पर चढक़र तारें हटानी पड़ी। इस बीच लगभग पांच मिनट का समय गाड़ी को तारों से निकालने में लग गया।











