जौनपुर के करंजाकला विकासखंड के ग्राम काजीबाजार में मलेरिया का नया मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर जाकर 'सोर्स रिडक्शन' और जागरूकता अभियान चलाया।
जौनपुर: काजीबाजार में मिला मलेरिया का नया मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट; जानें जिले के ताजा आंकड़े और बचाव के उपाय”
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : अब्दुल हई की रिपोर्ट
बरसात के मौसम में जलभराव और मच्छरों के पनपने के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
जौनपुर जिले के विकासखंड करंजाकला अंतर्गत ग्राम काजीबाजार में मलेरिया (Malaria) का एक नया धनात्मक (पॉजिटिव) मरीज मिलने से हड़कंप मच गया है।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मरीज के घर और आसपास के क्षेत्र में निरोधात्मक गतिविधियां और सघन जांच अभियान शुरू कर दिया है।
मलेरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। जिला मलेरिया अधिकारी ने लोगों से अपील की है कि बुखार आने पर घबराएं नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध निःशुल्क जांच और उपचार का लाभ उठाएं।
30 जुलाई 2026 को जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्राम काजीबाजार में मलेरिया धनात्मक मरीज ‘रेशमा (पत्नी बदरे आलम)’ के घर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
टीम ने मौके पर निम्नलिखित निरोधात्मक गतिविधियां संचालित कीं:
मरीज का भौतिक सत्यापन और स्वास्थ्य शिक्षा।
मच्छरों के पनपने वाले स्थानों (ब्रीडिंग सोर्स) का सर्वे और सोर्स रिडक्शन (लार्वा नष्ट करना)।
गांव में पोस्टर चस्पा करना और पम्पलेट बांटकर मलेरिया के प्रति जागरूकता फैलाना।
इस टीम में सहायक मलेरिया अधिकारी अशोक कुमार, एसएफडब्ल्यू इंद्रजीत सिंह, एफडब्ल्यू रामरूप यादव और स्थानीय आशा कार्यकर्ता अमृता देवी भी शामिल थीं।
जिला मलेरिया अधिकारी के अनुसार, जिले में मलेरिया की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी मरीज की मृत्यु नहीं हुई है।
| विवरण | आंकड़े |
| कुल संभावित मरीजों की जांच | 1,76,094 |
| कुल पॉजिटिव (धनात्मक) मरीज | 14 |
| स्वस्थ हुए (उपचार पूर्ण) | 11 |
| वर्तमान में एक्टिव (उपचार जारी) | 3 |
| मलेरिया से मृत्यु | 0 |
नोडल अधिकारी (VBD) डॉ. आलोक सिंह ने बताया कि मलेरिया मादा ‘एनाफिलीज’ मच्छर के काटने से फैलता है।
उत्तर भारत में ज्यादातर मामले ‘प्लाज्मोडियम वाइवैक्स’ (Plasmodium vivax) के आते हैं, जबकि ‘प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम’ (Plasmodium falciparum) अधिक गंभीर और जानलेवा हो सकता है।
ठंड लगकर तेज बुखार आना और कंपकंपी छूटना।
सिर और शरीर में तेज दर्द।
उल्टी, मितली और भूख कम लगना।
खून की कमी और सांस फूलना।
गंभीर मामलों में लीवर/तिल्ली का बढ़ना और दिमागी मलेरिया होना।
जिला मलेरिया अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जनपद के मेडिकल कॉलेज, जिला चिकित्सालय, सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC/PHC) तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर मलेरिया की जांच और उपचार की निःशुल्क व्यवस्था उपलब्ध है।
आशा और एएनएम (ANM) द्वारा भी क्षेत्र में घर-घर जाकर बुखार के मरीजों की पहचान की जा रही है।
सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें।
घर और आसपास साफ-सफाई रखें, कहीं भी जलभराव न होने दें।
कूलर, गमलों और फ्रिज की ट्रे का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य बदलें।
पानी की टंकियों को ढककर रखें।
बुखार आने पर स्वयं दवा (Self-medication) लेने के बजाय तत्काल निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं।
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