इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भारत की लंबी छलांग

मेक इन इंडिया 2.0: इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को ₹40,000 करोड़ का ‘बूस्टर डोज़’, अब दुनिया की ‘फैक्ट्री’ बनेगा भारत

“भारत अपनी ‘असेंबली लाइन’ की छवि को तोड़कर अब ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनने की दिशा में निर्णायक छलांग लगाने जा रहा है”

नई दिल्ली “The Politics Again” संतोष सेठ की रिपोर्ट 

केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना (ECMS) के लिए आवंटन को बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया है।

यह फैसला इस बात का संकेत है कि सरकार अब केवल ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को ही नहीं, बल्कि उनके भीतर लगने वाले एक-एक पुर्जे (Component) को भी भारत में ही बनाना चाहती है।

11 साल का सफर: आयातक से निर्यातक तक

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 11 वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 6 गुना बढ़ा है।

  • 2014-15: उत्पादन केवल ₹1.9 लाख करोड़ था।

  • 2024-25: यह आंकड़ा बढ़कर ₹11.3 लाख करोड़ हो गया है।

  • निर्यात: इसी अवधि में निर्यात ₹38,000 करोड़ से बढ़कर ₹3.27 लाख करोड़ (8 गुना वृद्धि) हो गया है। आज इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी है।

मोबाइल क्रांति: 2 फैक्ट्रियों से 300 तक

मोबाइल निर्माण इस सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण है। 2014 में देश में मोबाइल बनाने वाली केवल 2 इकाइयां थीं, जो आज बढ़कर 300 से अधिक हो गई हैं।

भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है और मोबाइल निर्यात में 127 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है।

ECMS: आत्मनिर्भरता की नई रीढ़

अप्रैल 2025 में शुरू की गई ‘इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना’ (ECMS) को अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है।

दिसंबर 2025 तक, इस योजना के तहत ₹1.15 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं, जो सरकार के मूल लक्ष्य से दोगुना है। इसके तहत 11 राज्यों में 46 आवेदनों को मंजूरी दी गई है।

अब भारत में ही मल्टी-लेयर पीसीबी (PCB), कैमरा मॉड्यूल, कनेक्टर्स और आईटी हार्डवेयर के पुर्जे बनेंगे। इससे चीन जैसे देशों पर निर्भरता खत्म होगी।

भविष्य का लक्ष्य: $500 बिलियन की अर्थव्यवस्था

सरकार ने 2030-31 तक 500 अरब डॉलर (बिलियन डॉलर) के घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकोसिस्टम का लक्ष्य रखा है।

बजट 2026-27 में माइक्रोवेव ओवन के पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी में छूट और खिलौनों के पुर्जों पर सेस हटाने जैसे कदम इसी दिशा में उठाए गए हैं।

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