जौनपुर में वकीलों का हड़ताल, लखनऊ लाठीचार्ज के खिलाफ प्रदर्शन
जौनपुर में वकीलों का हल्ला बोल: लखनऊ में चैंबरों पर बुलडोजर और लाठीचार्ज के विरोध में न्यायिक कार्य का बहिष्कार, DM को सौंपा ज्ञापन”
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं के चैंबरों पर बुलडोजर चलाने और उन पर हुए पुलिस लाठीचार्ज की आग अब जौनपुर तक पहुंच गई है।
इस दमनात्मक कार्रवाई के विरोध में जौनपुर के वकीलों ने सोमवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
आक्रोशित अधिवक्ताओं ने पूरे दिन न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया और दीवानी न्यायालय से कलेक्ट्रेट परिसर तक विशाल पैदल मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।
वकीलों ने जिलाधिकारी (DM) के माध्यम से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें दोषियों पर सख्त कार्रवाई और वकीलों की सुरक्षा की मांग की गई है।
आपात बैठक में सरकार और पुलिस प्रशासन की कड़ी निंदा
न्यायालय परिसर में धरना-प्रदर्शन से पहले दीवानी न्यायालय स्थित अधिवक्ता संघ सभागार में एक आपात बैठक बुलाई गई।
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इस बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष सुभाष चंद्र यादव (एडवोकेट) ने की, जबकि संचालन मंत्री रणबहादुर यादव (एडवोकेट) ने किया।
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बैठक में सभी वक्ताओं ने एक सुर में लखनऊ की घटना को अधिवक्ता समाज के सम्मान पर सीधा हमला करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की।
‘बुलडोजर और लाठियां चलाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत’
अध्यक्ष सुभाष चंद्र यादव ने कड़े शब्दों में कहा कि न्यायपालिका के महत्वपूर्ण अंग के रूप में अधिवक्ता समाज संविधान, कानून और आमजन के अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव संघर्षरत रहा है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा,
“अधिवक्ताओं के चैंबरों पर बुलडोजर चलाना और उनके शांतिपूर्ण विरोध पर लाठियां बरसाना लोकतांत्रिक मूल्यों के बिल्कुल विपरीत है, जिसे अधिवक्ता समाज किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।”
गूंजे नारे- “अधिवक्ताओं का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान”
धरना-प्रदर्शन के दौरान पूरा न्यायालय परिसर सरकार और प्रशासन विरोधी नारों से गूंज उठा। वकीलों ने “पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद”, “अधिवक्ता एकता जिंदाबाद” और “अधिवक्ताओं का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे गगनभेदी नारे लगाए।
प्रदर्शनकारी वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी अधिकारियों के खिलाफ जल्द और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इस आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
अधिवक्ता संघ की 5 प्रमुख मांगें:
अधिवक्ता संघ ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और निम्नलिखित मांगों को अविलंब पूरा करने की अपील की है:
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वैकल्पिक व्यवस्था: प्रदेश सरकार अधिवक्ताओं के चैंबरों के लिए सम्मानजनक और स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे।
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चैंबरों का पुनर्निर्माण: ध्वस्त किए गए चैंबरों को पुनः स्थापित किया जाए।
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दोषियों पर एक्शन: दोषी अधिकारियों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में अधिवक्ताओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
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आर्थिक मुआवजा: अधिवक्ताओं के नुकसान की भरपाई के लिए उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
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प्रोटेक्शन एक्ट: प्रदेश में ‘अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट’ (Advocate Protection Act) को अविलंब लागू किया जाए।











