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लद्दाख : 17 नई तहसीलें बनीं, अब नहीं करना होगा 300 KM का सफर

लद्दाख में ऐतिहासिक प्रशासनिक बदलाव: 17 नई तहसीलों का गठन, अब सरकारी दफ्तर के लिए नहीं नापने होंगे 300 KM”

श्रीनगर / लेह: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

क्षेत्रफल के लिहाज से भारत के सबसे बड़े केंद्र-शासित प्रदेशों में से एक, लद्दाख (Ladakh) के दुर्गम और दूर-दराज गांवों में रहने वाले लोगों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर है।

अब तक यहां के निवासियों को छोटे-छोटे सरकारी और राजस्व (रेवेन्यू) कामों के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए 300 किलोमीटर से ज्यादा का थका देने वाला सफर तय करना पड़ता था। लेकिन अब यह बीते दिनों की बात होने वाली है।

केंद्र-शासित प्रदेश बनने के लगभग सात साल बाद, लद्दाख प्रशासन ने ‘रेवेन्यू मैप’ में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए 17 नई तहसीलों के गठन का ऐलान किया है।

कुल 32 हुईं तहसीलें, 5 नए जिलों को मिलेगी रफ्तार

इस नए बदलाव के बाद लद्दाख में तहसीलों की कुल संख्या 15 से बढ़कर 32 हो गई है। प्रशासन ने यह महत्वपूर्ण कदम पांच नए जिलों— नुब्रा, शाम, चांगथांग, ज़ंस्कार और द्रास— की घोषणा के महज तीन महीने के भीतर उठाया है।

इन नए जिलों के बनने से लद्दाख में जिलों की कुल संख्या पहले ही 2 (लेह और करगिल) से बढ़कर 7 हो गई है।

नई तहसीलों के गठन का मुख्य उद्देश्य इन पांचों नए जिलों के राजस्व प्रशासन (Revenue Administration) को पूरी तरह से कार्यशील (Operational) बनाना है।

ताकि दूर-दराज और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों तक सरकारी योजनाएं और सेवाएं आसानी से पहुंच सकें।

300 किलोमीटर का सफर होगा खत्म

पहाड़ी इलाका, खराब मौसम, कम आबादी और दूर-दूर तक फैली बस्तियों के कारण लद्दाख में प्रशासनिक कामकाज हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, लद्दाख के कई हिस्सों में भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि एक प्रमाण पत्र बनवाने या सरकारी सेवा का लाभ उठाने के लिए लोगों को 300 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा करनी पड़ती थी।

प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि नई तहसीलों के अस्तित्व में आने से लोगों की यह दूरी घटेगी और उनके समय व पैसे दोनों की बचत होगी।

आखिर क्यों पड़ा लद्दाख का ‘रेवेन्यू मैप’ बदलने की जरूरत?

इस बड़े बदलाव के पीछे केंद्र शासित प्रदेश स्तर की एक विशेष कमेटी की रिपोर्ट है। इस कमेटी ने अपनी विस्तृत समीक्षा में पाया कि:

  • लद्दाख की पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था में कई तहसीलें ऐसी थीं, जो एक से ज़्यादा जिलों की सीमाओं में फैली हुई थीं।

  • इससे अधिकार-क्षेत्र (Jurisdiction) का ओवरलैप हो रहा था, जिससे आम लोगों के साथ-साथ प्रशासन को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

नई व्यवस्था के नियम: नई व्यवस्था के तहत, अब हर रेवेन्यू विलेज (राजस्व गांव) को केवल एक ही तहसील से जोड़ा जाएगा, और हर तहसील अनिवार्य रूप से एक ही जिले के अंतर्गत आएगी।

सबसे खास बात यह है कि प्रशासन ने किसी भी जिले की भौगोलिक (Geographical) सीमा में बदलाव किए बिना ही राजस्व प्रशासन का यह साफ-सुथरा ढांचा तैयार किया है।

17 नियाबतों को मिला तहसील का दर्जा

इस पुनर्गठन (Restructuring) के तहत, लद्दाख में पहले से मौजूद 17 ‘नियाबतों’ (Niabats) को प्रमोट करके पूरी तरह से तहसील का दर्जा दे दिया गया है।

नई प्रशासनिक इकाइयां बिना किसी देरी के अपना काम शुरू कर सकें, इसके लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत प्रभाव से सभी जगह ‘तहसीलदार’ नियुक्त करें।

पुनर्गठन के बाद क्या है लद्दाख की नई स्थिति?

नए प्रशासनिक ढांचे के बाद लद्दाख के 7 जिलों में तहसीलों का बंटवारा इस प्रकार होगा:

  • करगिल (Kargil): 7 तहसील

  • नुब्रा (Nubra): 6 तहसील

  • लेह (Leh): 5 तहसील

  • शाम (Sham): 5 तहसील

  • चांगथांग (Changthang): 4 तहसील

  • ज़ंस्कार (Zanskar): 4 तहसील

  • द्रास (Drass): 1 तहसील

Santosh SETH

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