होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने जहां इस जलमार्ग का 'संरक्षक' बनने की बात कही है, वहीं ईरान ने किसी भी दखलंदाजी पर कड़े जवाब की चेतावनी दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा, ईरान ने दी ‘कड़े जवाब’ की चेतावनी; जानें पूरा विवाद”
वाशिंगटन/तेहरान: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
ईरान के साथ लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अमेरिका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण अपने हाथ में लेगा।
साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा करने के बदले अमेरिका को भुगतान (मुआवजा) किया जाना चाहिए।
फॉक्स न्यूज (Fox News) के साथ फोन पर हुए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस जलडमरूमध्य का “रक्षक” (Guardian) बनेगा और समुद्री यातायात की सुरक्षा करने के लिए वह मुआवजे का हकदार है।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “हम उस जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) पर कब्ज़ा बनाए रखेंगे और शायद उसे हम ही चलाएंगे।
हम उस जलडमरूमध्य के संरक्षक बन जाएंगे। हो सकता है कि हम उसे ‘जलडमरूमध्य का संरक्षक फ़रिश्ता’ कहें। और इसके लिए हमें मुआवज़ा मिलना चाहिए।”
होरमुज़ जलडमरूमध्य फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद अहम लाइफलाइन है।
दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुज़रती है।
यहाँ शिपिंग में किसी भी तरह की रुकावट से दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
वर्तमान में वाशिंगटन और तेहरान के बीच इस बात को लेकर दावे-प्रतिदावे किए जा रहे हैं कि इस जलमार्ग पर किसका नियंत्रण है।
ईरान का कहना है कि इस जलमार्ग पर उसका अधिकार है, जबकि अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन अधिकारों के तहत व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के जारी रहनी चाहिए।
ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण करने के बारे में ट्रंप की टिप्पणी को तुरंत और सिरे से खारिज कर दिया है।
देश की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग के प्रबंधन में उसे दखल नहीं देने देगी।
ईरानी सेना ने कहा कि “ईरान की मंज़ूरी के बिना अमेरिकी सेनाओं द्वारा इस जलडमरूमध्य से गुज़रने की किसी भी कोशिश का ‘कड़ा जवाब’ दिया जाएगा।”
सेना ने क्षेत्रीय देशों को भी चेतावनी दी कि वॉशिंगटन के साथ किसी भी तरह के सहयोग को ‘ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध’ माना जाएगा।
ईरान ने साफ किया कि अगर यह टकराव बढ़ता है, तो यह पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी अमेरिका और उसके सहयोगियों की होगी।
इंटरव्यू के दौरान, ट्रंप ने ईरान पर बातचीत के दौरान बार-बार अपना रुख बदलने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “कल उनकी 11 घंटे तक बैठक चली… वे एक मिनट में एक वाक्य पर भी सहमत नहीं हो पा रहे हैं।
कल सब कुछ तय हो गया था, लेकिन फिर वे कमरे से बाहर निकलते हैं और वापस फ़ोन करके कहते हैं, हमें कुछ बदलाव करने थे। हम कोई बदलाव नहीं करने वाले। वे पेशेवर बातचीत करने वाले (नेगोशिएटर) हैं।”
ट्रंप ने ईरान को मज़बूत होने देने और उसका डटकर सामना न कर पाने के लिए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों—बराक ओबामा, जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और बिल क्लिंटन को ज़िम्मेदार ठहराया।
उन्होंने एक बार फिर 2015 की ‘ईरान परमाणु डील’ (JCPOA) की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस डील ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर रोक लगाने के बजाय तेहरान को और अधिक मज़बूत किया है।
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