कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट का डेटा डार्क वेब पर लीक ?
डार्क वेब पर लीक हुआ भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर प्लांट का डेटा! ‘वर्ल्ड लीक्स’ का दावा, रिलायंस और CERT-In कर रहे जांच”
नई दिल्ली: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार : भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सुरक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है।
रैनसमवेयर ग्रुप ‘वर्ल्ड लीक्स’ ने डार्क वेब पर भारत के सबसे बड़े ‘कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट’ (तमिलनाडु) से जुड़ी फाइलों का एक बड़ा कलेक्शन पोस्ट किया है।
इन लीक दस्तावेजों में प्लांट के कथित ब्लूप्रिंट और सप्लायर की संवेदनशील जानकारी शामिल है। बताया जा रहा है कि यह डेटा अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप के सर्वर्स में सेंध लगाकर चुराया गया है।
क्या-क्या हुआ है लीक?
रॉयटर्स की समीक्षा के अनुसार, डार्क वेब पर पोस्ट किए गए ये दस्तावेज 2016 से लेकर 2025 के मध्य तक के हैं।
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वर्ल्ड लीक्स वेबसाइट पर मौजूद रिलायंस की कुल 8,58,000 फाइलों में से करीब 19,000 फाइलें सबसे ज्यादा संवेदनशील मानी जा रही हैं।
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इनमें कथित तौर पर प्लांट के ब्लूप्रिंट, सप्लायर की जानकारी, मीटिंग और इंस्पेक्शन के रिकॉर्ड, उपकरणों की समीक्षा और इंश्योरेंस पॉलिसी के दस्तावेज शामिल हैं।
रिलायंस और डेटा सेंटर ‘योटा’ (Yotta) का बयान
इस प्लांट के कॉन्ट्रैक्टर्स में से एक, अनिल अंबानी की कंपनी ‘रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर’ को 2018 में प्लांट की यूनिट 3 और यूनिट 4 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन करने और बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला था (ये दोनों यूनिट 2027 तक चालू होनी हैं, जिनसे 2,000 मेगावाट बिजली पैदा होगी)।
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रिलायंस ग्रुप ने बयान में माना है कि थर्ड-पार्टी भारतीय डेटा सेंटर सर्विस प्रोवाइडर ‘योटा’ (Yotta) द्वारा होस्ट किए गए सर्वर पर उनके डेटा में “आंशिक सेंध” (partial breach) लगी है और सरकार को सूचित कर दिया गया है।
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वहीं, ‘योटा’ ने बताया कि 29 मई को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के एक सर्वर पर संदिग्ध गतिविधि देखी गई थी, जिसे तुरंत रोककर रैंसमवेयर हमले को नाकाम किया गया था।
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हालांकि, जून के आखिर में बाहरी खतरों (external threat actors) द्वारा डेटा लीक का दावा किया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “गंभीर” खतरा
न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव के सीनियर डायरेक्टर निकोलस रोथ का कहना है कि ऐसे डेटा में सेंध लगने से किसी भी न्यूक्लियर प्लांट की सुरक्षा के लिए एक “गंभीर” खतरा पैदा हो सकता है।
यह घटना दर्शाती है कि भारत में हैकिंग कितनी आम हो गई है, जबकि कई कंपनियों के पास ऐसे खतरों से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन या तैयारी नहीं है।
कौन कर रहा है जांच?
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CERT-In और NPCIL एक्शन में: सूत्रों के अनुसार, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL) इस सेंधमारी के बारे में रिलायंस से लगातार बातचीत कर रहा है।
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भारत की मुख्य साइबर-सिक्योरिटी एजेंसी ‘इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम’ (CERT-In) इस गंभीर घटना की गहन जांच कर रही है।
कौन है ‘वर्ल्ड लीक्स’ (World Leaks)?
वर्ल्ड लीक्स एक कुख्यात रैंसमवेयर ग्रुप है। यह ग्रुप आम तौर पर चुराया गया कॉर्पोरेट डेटा अपनी वेबसाइट पर तब डाल देता है, जब कंपनियां उनकी मांगी गई फिरौती (Ransom) देने से मना कर देती हैं।
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इससे पहले इस ग्रुप ने नाइकी (Nike) और भारत के टाटा ग्रुप को भी निशाना बनाया था।
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जून में वर्ल्ड लीक्स ने टाटा ग्रुप से 1.5 मिलियन डॉलर की फिरौती मांगी थी और मांग पूरी न होने पर एप्पल (Apple) और टेस्ला (Tesla) के गोपनीय कंपोनेंट डिजाइन लीक कर दिए थे।











