Keralam Assembly session discussing the resolution against CEC Gyanesh Kumar.

केरलम विधानसभा: CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव पारित

केरलम विधानसभा में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव पारित; चुनाव आयोग चयन समिति में CJI को शामिल करने की मांग, BJP का पलटवार”

तिरुवनंतपुरम: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

देश में चुनाव आयोग (EC) की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद अब केरलम विधानसभा पहुंच गया है।

सोमवार को केरलम विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाले पैनल को पुनर्गठित करने की मांग की गई है।

मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की ओर से पेश किया गया यह प्रस्ताव कुछ संशोधनों के साथ पारित हो गया, हालांकि सदन में मौजूद तीन भाजपा सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध किया।

SIR और वोटर लिस्ट से जुड़े गंभीर आरोप

इस प्रस्ताव के केंद्र में मतदाता सूची का ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) है। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि इस रिविजन प्रक्रिया में तकनीकी हेरफेर और अनियमितताएं की गई हैं।

  • वोटिंग अधिकार छिनने का खतरा: आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट नियम या पूर्व सूचना के योग्य मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जिससे हाशिए पर रहने वाले समुदायों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी श्रमिकों और युवा मतदाताओं के मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है।

  • अधिकारियों की शक्तियां कम करना: प्रस्ताव में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया कि चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर सिस्टम के जरिए ‘इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स’ (ERO) की शक्तियों को सीमित कर दिया है और मौजूदा नियमों के खिलाफ जाकर ‘फॉर्म 6’ में संशोधन किया है।

  • आयोग में असहमति: रिपोर्टों के हवाले से यह भी दावा किया गया कि आयोग के ज्यादातर सदस्यों ने इन विवादास्पद कदमों पर अपनी असहमति जताई थी।

प्रस्ताव में क्या हैं मुख्य मांगें?

विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव में चुनाव आयोग से कथित अनियमितताओं को तुरंत ठीक करने और हटाए गए सभी योग्य नागरिकों के वोट देने के अधिकार बहाल करने की मांग की गई है।

  • चयन पैनल का पुनर्गठन: प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया है कि चुनाव आयुक्तों को चुनने वाली समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता के साथ-साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि यह संवैधानिक संस्था सरकार के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त और निष्पक्ष होकर काम कर सके।

BJP का तीखा पलटवार: “यह गैर-कानूनी और धोखेबाजी की राजनीति”

केरलम विधानसभा में पास हुए इस प्रस्ताव पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है। केरलम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सीपीएम और कांग्रेस पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए इस प्रस्ताव को ‘गैर-कानूनी’ करार दिया।

राजीव चंद्रशेखर ने कहा,

“आज केरलम विधानसभा में हमने एक बहुत ही अजीब नजारा देखा। आम तौर पर एक-दूसरे के विरोधी होने का दावा करने वाले सीपीएम और कांग्रेस के 137 विधायकों ने मिलकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह गैर-कानूनी प्रस्ताव पास किया है। यह राहुल गांधी की धोखेबाजी वाली राजनीति का एक और उदाहरण है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह पूरा मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन (Sub-judice) है और विधानसभा ने स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हुए इस पर कार्रवाई की है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी और वीडी सतीशन अपनी विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं।

📊  केरलम का ‘एंटी-CEC’ प्रस्ताव (एक नज़र में)

प्रमुख पहलू (Key Aspects)

विस्तृत जानकारी (Details)

📜 प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाना और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार।

⚠️ लगाए गए मुख्य आरोप

SIR के तहत बिना सूचना योग्य वोटरों के नाम काटना; ERO की शक्तियां सीमित करना; ‘फॉर्म 6’ में नियम विरुद्ध संशोधन।

⚖️ पैनल में बदलाव की मांग

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले पैनल में PM और नेता प्रतिपक्ष के साथ CJI (मुख्य न्यायाधीश) को शामिल करने की सिफारिश।

🤝 विधानसभा का समीकरण

सत्ता पक्ष और विपक्ष (CPM + कांग्रेस के 137 विधायक) ने मिलकर किया समर्थन; 3 BJP विधायकों ने किया विरोध।

🔴 BJP की प्रतिक्रिया

प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने प्रस्ताव को ‘गैर-कानूनी’ बताया; कहा- मामला कोर्ट में है, यह सिर्फ जनता का ध्यान भटकाने की साजिश है।